रायपुर
छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत हुए मुआवजा घोटाले की जांच अब नए सिरे से की जाएगी। संभाग आयुक्त महादेव कांवरे ने इस फर्जीवाड़े की गहराई से जांच के लिए आला अफसरों की दो नई टीमें बनाई हैं। इस बार की जांच सबसे अलग होगी क्योंकि टीम उन सभी खसरा नंबरों की बारीकी से पड़ताल करेगी जिनका मुआवजा दिया जा चुका है, भले ही उनकी शिकायत मिली हो या नहीं।
जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक महीने की सख्त समय सीमा तय की गई है। रायपुर जिले में जांच की कमान डिप्टी कलेक्टर ज्योति सिंह को सौंपी गई है, जबकि धमतरी जिले के खसरा नंबरों की जांच अपर कलेक्टर पवन कुमार के नेतृत्व वाली टीम करेगी। हाल ही में ईडी की जांच में कई बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद प्रशासन ने अब एक-एक खसरा नंबर की भौतिक जांच का निर्णय लिया है।
इससे पहले हुई जांचों में केवल शिकायत वाले मामलों पर ध्यान दिया गया था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया को संदेह के दायरे में रखकर जांचा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इस मामले में पहले ही दो डिप्टी कलेक्टरों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नई जांच से कई अन्य अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। यदि मुआवजा वितरण में कोई भी अनियमितता पाई गई तो संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।