पेद्रो सांचेज़: ट्रंप की आंखों की किरकिरी

पेद्रो सांचेज़: ट्रंप की आंखों की किरकिरी

-डॉ. सुधीर सक्सेना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक परिदृश्य में उभरे उन नायकों को कतई पसंद नहीं करते हैं, जो उनकी बात नहीं मानते हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ऐसे नेताओं में अग्रणी हैं। दुनिया के खुदमुख्तार होने के दर्प में बैठे ट्रंप को न तो पेद्रो का चेहरा रास आ रहा है और न ही उनकी बोली सुहाती है। लेकिन पेद्रो हैं कि अपनी कथनी और करनी से उन्हें क्षुब्ध और रुष्ट करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, फलतः वह ट्रंप की आंखों की ऐसी किरकिरी बनकर उभरे हैं, जो दिनोंदिन ज्यादा बड़ी और तकलीफदेह होती जा रही है। चाहे नाटो का मामला हो या स्पेनी एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति, उन्होंने ट्रंप के कहे की अवज्ञा तो की ही, 18 अप्रैल को बार्सिलोना में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, कोलंबिया और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्राध्यक्षों के चौथे ‘लोकतंत्र बचाव’ सम्मेलन की मेजबानी भी कर डाली। यही नहीं, इसी रोज़ उन्होंने विश्व के प्रगतिशील ताकतों को गतिशील करने के प्रयोजन से ब्राजील के लूला डी सिल्वा और दक्षिण अफ्रीका के सिरिल रामाफोसा के साथ करीब तीन हजार तरक्कीपसंद अफसरों, कार्यकर्ताओं और समाचार विश्लेषकों के सम्मेलन को संबोधित भी किया। इस सम्मेलन में ट्रंप की विरोधी हिलेरी क्लिंटन की वीडियो क्लिप भी दिखाई गई, जिसमें हिलेरी कहती सुनी गयीं कि राह में कितनी भी विषमताएं क्यों न हों, हम बेहतर भविष्य रच सकते हैं।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहूत सम्मेलन को लूला, रामाफोसा और सांचेज़ के अलावा मेक्सिको की क्लाउडिया शीनबाम और कोलंबिया के गुस्तावो पेद्रो ने भी सम्भोदित किया और सुरक्षा परिषद पर पुनर्विचार की मांग की। कौन हैं ये पेद्रो सांचेज़, जिन्होंने विश्व में अमेरिका के वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष का बीड़ा उठाया है और जो अमेरिका की लानत मलामत के साथ ही वामोन्मुख ताकतों को एकजुट कर रहा है?

29 फरवरी, 1972 को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में जन्मे पेद्रो सन 2018 से स्पेन के प्रधानमंत्री हैं। इसके अलावा वह सत्तारूढ़ स्पेनिश सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी के महासचिव भी है। सोशलिस्ट इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का नौवां अध्यक्ष होना उनकी महत्ता और विचारधारा को इंगित करता है। उनकी राजनीतिक यात्रा दो दहाई पहले तब शुरू हुई थी, जब उन्होंने मैड्रिड में पार्षद का चुनाव लड़ा था। उनका राजनीतिक करियर धूपछाँही रहा है और उन्हें सफलता रातों-रात या सेंतमेत में नहीं मिली। यहां तक कि उन्हें महासचिव पद के लिये भी पापड़ बेलने पड़े। पिता पेद्रो सांचेज फर्नाडेज़ संस्कृति मंत्रालय के रूपकर कलाओं व संगीत के राष्ट्रीय संस्थान में कार्यरत थे और माँ मग्दलीना सिविल सर्वेंट थी। मजेदार बात है कि माँ-
बेटे ने वकालत की सनद एक साथ हासिल की। ब्रेक डांस और बास्केट बॉल के शौकीन पेद्रो यूँ तो 1993 में ही वर्कर्स पार्टी से जुड़ गये थे, लेकिन सन 1995 में स्नातक होने के बाद वह ग्लोबल परामर्शदात्री फर्म में काम करने न्यूयार्क चले गये। कुछ अर्सा ब्रसेल्स में बिताने क बाद, वह योरोपीय यूनियन के शिष्टमंडल में शामिल रहे। उन्होंने बोस्निया-हर्जगोविना में काम किया और वहाँ से लौटकर पोलिटिक्स एवं अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की है। उनकी अध्ययन-वृति कि चार साल बाद उन्होंने तीसरी डिग्री हासिल की और सन 2012 में डॉक्टरेट! उस साल वह व्याख्याता भी रहे। पेद्रो स्पेन के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो फर्राटेदार इंग्लिश बोलते-समझते हैं। सन 2014 का वर्ष उनके जीवन में वसंत लेकर आया। इस साल वह पार्टी के महासचिव और नेता प्रतिपक्ष बने। अगले वर्ष संपन्न आमचुनाव में वह प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी थे, लेकिन उनकी पार्टी दूसरी पायदान पर रही। पार्टी का महासचिव का पद फिसलने के बाद आठ माह में फिर उनके हाथों में आ गया। एक जून 2018 को पीएम मारिआनो राजोय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद नरेश फेलिप षष्टम ने उन्हें प्रधानमंत्री मनोनीत किया। बतौर पीएम उन्होंने जोखिम उठाये। स्नैप-पोल कराया। जोखिम उन्हें फला। 2019 और 2023 में वह पुन: पीएम बने। दीगर है कि उन्हें छोटे-मोटे दलों से गठजोड़ करना पड़ा। पत्नी बेगीना गोमेज के सरकारी कामों में दखल को लेकर भी वह विवादों में रहे।

पेद्रो अपने देश में संघीय ढाँचे के दृढ़ पैरोकार हैं। इसे वह कैटालोनिया को देश के भीतर बनाये रखने के लिये जरूरी मानते है। वह वित्तीय सुधारों के भी हिमायती हैं। घरेलू मोर्चे पर उनकी नीतियां स्पष्ट हैं। वह युवकों को बेरोजगारी भत्ता देने के पक्षधर हैं और आव्रजन के प्रति उनकी नीति उदार है। आव्रजकों के लिए उन्होंने ‘ओपन डोर’ पालिसी अपनायी है। यहां तक कि उन्होंने अफगान शरणार्थियों के लिये शिविर खोले, जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। लैंगिक समानता के पक्षधर पेद्रो के मानवाधिकार और पर्यावरण पर विचार स्पष्ट है। घृणा-वाणी और अपसूचना को वह पसंद नहीं करते और अति-धनाढ्यों पर टैक्स की पैरवी करते हैं। शीनबाम और लूला जैसे राष्ट्रनायकों से उनकी निभती है। लूला के साथ वह शिखरवार्ता भी कर चुके हैं और शीनबाम के कथन से सहमत हैं कि विभिन्न देशों को सैन्य-बजट की दस फीसद राशि हरीतिमा पर खर्च करनी चाहिये। दोनों नेता युद्ध के बजाय जीवन के बीज बोना चाहते हैं। वह कहते हैं-“यदि धुर दक्षिण वैश्विक है तो हमें भी होना चाहिये। रामाफोसा और उनका साझा मत है कि यूएनओ दंतविहीन संगठन है और सुरक्षा परिषद् की संरचना पर पुनर्विचार होना चाहिये। वजह यह कि रूस और अमेरिका जैसे परिषद के सदस्य ही उन्मादी हैं। अमेरिका ने ईरान तो रूस ने उक्राइना के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। पेद्रो मानते हैं कि ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय नियमों की कोई परवाह नहीं है और वह बल प्रयोग का आदी है।

आप्रवासियों के प्रति उदार पेद्रो ने सेनेगल, मोरक्को और माली के शरणार्थियों के लिये स्पेन के दरवाजे खोल रखे हैं। सन 2027 तक वह इन देशों के करीब नौ लाख आव्रजकों के पुनर्वास को कानूनी जामा पहनायेंगे। वह आव्रजन को विधिसम्मत बनाना चाहते हैं। अमेरिका के वेनजुएला में दखल की उन्होंने निंदा की थी और इस्रायल की गाजा व अन्यत्र कार्रवाइयों का तीखा विरोध। उनकी दृष्टि में इस्रायल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का दोषी है। वह इस्रायल को जातीय-संहार का दोषी मानते हुये उससे कोई कारोबार नहीं करना चाहते। वह कहते हैं कि स्पेन के पास एटम बम नहीं है लेकिन स्पेन इस्रायल को जंग से रोकने की कोशिश करता रहेगा।

हाल में वह चीन गये तो विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर उनके और जिनपिंग के सुर यकसां थे। इसके पहले वह जर्मन चांसलर ओल्फ शाल्ज और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडन से मिले थे। समान राय कायम करने के लिये वह योरोपीय यूनियन के चार्ल्स माइकल और उर्सुला वान डेरलेयेन से भी मिले। योरोपीय यूनियन को अधिक सक्रिय और एकात्म बनाने के साथ ही वह स्पेन को विश्व मंच पर प्रभावी भूमिका में देखना चाहते हैं। उनके जेहन में अतीत के शक्तिशाली स्पेन की छवि है। वह योरोपीय यूनियन और यूरो दोनों को मजबूती देने की बात कहते हैं और मानते हैं कि ईयू के दुश्मन ईयू के भीतर ही हैं। ट्रंप-विरोध में अग्रणी पेद्रो जब-तब ट्रंप को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आते। उन्होंने वेनेजुएला और ईरान में अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया और नाटो को पांच फीसद ट्रंप की गुजारिश ठुकरा दी। उन्होंने दो टूक कहा कि स्पेन पूर्ववत दो प्रतिशत योगदान ही देगा। उन्होंने ट्रंप की स्पेन से कारोबारी रिश्ते तोड़ने की धमकी की भी चिंता नहीं की। इन कारणों से उनका ट्रंप की आँखों की किरकिरी बनकर उभरना स्वाभाविक है। ट्रंप को पेद्रो सांचेज इसलिये भी नागवार गुजरते हैं, क्योंकि उन्होंने स्पेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, कोलंबिया और उरुग्वे का अघोषित मंच बना रखा है और विश्व-मंच पर अमेरिका की नीतियों की निंदा और विरोध का कोई मौका नहीं छोड़ते। पेद्रो के मिजाज को इससे समझा जा सकता है कि उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में बाइ‌बिल और सलीब का कोई इस्तेमाल नहीं किया और तानाशाह फ्रैंको की कब्र को खोदकर उसके अवशेषों को अन्यत्र दफ्नाने के आदेश में उन्हें कोई झिझक नहीं हुई।

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