गोदावरी माइंस की मनमानी पर बिफरे सांसद भोजराज नाग; कहा- “गांव से लोकसभा तक लड़ेंगे हक की लड़ाई”

भानुप्रतापपुर। गोदावरी माइंस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रिटेनिंग वॉल टूटने से मलबे की चपेट में आए दर्जनों परिवारों के आंसू देख कांकेर सांसद भोजराज नाग का पारा चढ़ गया। शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे सांसद ने कंपनी प्रबंधन की कड़ी फटकार लगाई और प्रशासन की सुस्ती पर नाराजगी जाहिर की। हादसे के चलते 23 परिवार बेघर होकर किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
पिछले दिनों माइंस से निकले भारी मलबे ने अचानक गांवों में तबाही मचा दी थी। कई घर ढह गए और ग्रामीणों की जीवन भर की जमापूंजी मिट्टी में मिल गई। प्रभावित परिवारों ने सांसद को आपबीती सुनाते हुए बताया कि कंपनी की लापरवाही ने उन्हें बेघर कर दिया है। आज स्थिति यह है कि 23 परिवारों को अपना मूल निवास छोड़कर दूसरी जगहों पर किराए पर रहना पड़ रहा है।

कंपनी और प्रशासन को सांसद की कड़ी चेतावनी

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सांसद भोजराज नाग ने कड़े लहजे में कहा कंपनी नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही है। हम अपने आदिवासी भाइयों और ग्रामीणों के जीवन के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। इन निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए यदि मुझे गांव से लेकर लोकसभा तक की दौड़ लगानी पड़ी, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। हर हाल में उचित मुआवजा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सांसद ने स्पष्ट किया कि विकास की आड़ में विनाश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कंपनी द्वारा पर्यावरण को पहुंचाई जा रही अपूरणीय क्षति और स्थानीय लोगों की बेदखली पर गंभीर चिंता जताई।

अधिकारियों की लगी क्लास, एसडीएम को लगाई फटकार

सांसद के दौरे के दौरान प्रशासनिक अमले की पोल भी खुल गई। सांसद ने भानुप्रतापपुर एसडीएम गंगाधर वाहिले को ग्रामीणों के सामने बुलाकर अब तक की गई कार्रवाई का हिसाब मांगा। प्रशासनिक सुस्ती: यह बात सामने आई कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। सांसद के आगमन की सूचना मिलते ही अधिकारी आनन-फानन में पहुंचे। सख्त निर्देश: सांसद ने सभी अधिकारियों को एक साथ जमाकर फटकार लगाई और वन विभाग को सेफ्टी जोन में हुई क्षति पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बड़े जन-आंदोलन की आहट

सांसद के ‘आर-पार’ की लड़ाई के ऐलान के बाद ग्रामीणों में न्याय की उम्मीद जागी है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि गोदावरी माइंस प्रबंधन ने जल्द ही अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारी और पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया, तो यह मुद्दा एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।

आरी डोंगरी खदान हादसे पर भैंसाकन्हार सरपंच का बड़ा बयान, कहा— यह तो सिर्फ शुरुआत

भानुप्रतापपुर क्षेत्र के आरी डोंगरी खदान में मलबा धसकने की घटना के बाद अब सरपंच रमल कोर्राम की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। ग्राम सरपंच रमल कोर्राम ने इस मामले को लेकर गंभीर चिंता जताई है और खदान संचालन पर सवाल उठाए हैं। सरपंच रमल कोर्राम ने कहा कि यह घटना केवल एक चेतावनी है और यदि खदानों में नियम-कानून को दरकिनार कर इसी तरह काम होता रहा, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे और भी विकराल रूप ले सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे तौर पर मजदूरों और आसपास के ग्रामीणों की जान को खतरे में डाल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब कोई व्यक्ति इन अनियमितताओं का विरोध करता है, तो उसे समाज में तिरछी नजर से देखा जाता है। इतना ही नहीं, गलत कामों में शामिल लोग सही तरीके से काम करने की बात उठाने वालों को बदनाम करने की कोशिश करते हैं और चौक-चौराहों पर उनकी खिल्ली उड़ाते हैं। सरपंच ने प्रशासन से मांग की है कि खदानों में हो रहे कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *