Meena Kumari Favorite Song: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी दर्द, तनहाई और संजीदा अभिनय का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम ‘ट्रेजेडी क्वीन’ मीना कुमारी (Meena Kumari) का ही आता है। रील लाइफ से लेकर रियल लाइफ तक मीना कुमारी की जिंदगी में दुखों का एक ऐसा साया रहा, जिसने उनके आखिरी वक्त को बेहद दर्दनाक बना दिया। महज 38 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली मीना कुमारी के अंतिम दिनों से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा है, जिसे सुनकर आज भी उनके फैंस की आंखें नम हो जाती हैं। बीमार हालत में बिस्तर पर पड़ी मीना कुमारी ने मशहूर सिंगर मोहम्मद रफी से अपने एक पसंदीदा गाने को गाने की फरमाइश की थी।

लीवर सिरोसिस की वजह से हुआ था निधन, आखिरी वक्त में मिला सिर्फ दर्द
मीना कुमारी ने पर्दे पर कई ऐसे यादगार और भावुक किरदार निभाए कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी उसी रूप में देखने लगे। लेकिन अफसोस कि उनकी निजी जिंदगी भी किसी ट्रेजेडी से कम नहीं रही। वह लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। इस बीमारी के चलते 31 मार्च 1972 को सिर्फ 38 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। जब वह अस्पताल के बिस्तर पर अपनी आखिरी सांसें गिन रही थीं, तब भी संगीत ही उनका इकलौता सहारा बना हुआ था।
‘प्यार का सागर’ फिल्म का यह गाना था दिल के सबसे करीब
बॉलीवुड के गलियारों में यह किस्सा बेहद मशहूर है कि मीना कुमारी को अपनी ही एक फिल्म का गाना बेहद पसंद था। हम बात कर रहे हैं साल 1961 में रिलीज हुई उनकी सुपरहिट फिल्म ‘प्यार का सागर’ (Pyaar Ka Sagar) की। इस फिल्म का एक बेहद रोमांटिक और सुकून देने वाला गाना था— ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले’ (Mujhe Pyaar Ki Zindagi)।
यह गीत मीना कुमारी के दिल के इतने करीब था कि जब भी वह उदास या तनाव में होती थीं, इसे गुनगुनाया करती थीं। इस फिल्म में उनके अपोजिट ‘जुबली कुमार’ यानी राजेंद्र कुमार (Rajendra Kumar) मुख्य भूमिका में थे। इस खूबसूरत गाने को मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) और आशा भोसले (Asha Bhosle) ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था।
जब मोहम्मद रफी ने अस्पताल के सिरहाने बैठकर गाया गीत
जब मीना कुमारी एकदम गंभीर हालत में बिस्तर पर पड़ी हुई थीं, तब फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकार और उनके पुराने दोस्त उनका हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचा करते थे। इसी दौरान एक दिन महान गायक मोहम्मद रफी भी उनसे मिलने पहुंचे।
रफी साहब को देखकर मीना कुमारी की आंखों में चमक आ गई और उन्होंने बेहद कमजोर आवाज में उनसे अपना पसंदीदा गाना ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले’ सुनाने की गुजारिश की। रफी साहब भी मीना कुमारी की इस हालत को देखकर भावुक हो गए और उन्होंने उनकी बात को टाला नहीं। वे मीना कुमारी के सिरहाने बैठ गए और बेहद सधे हुए सुरों में बिना किसी म्यूजिक के यह गीत गाकर सुनाया। कहा जाता है कि इस गाने को सुनते-सुनते मीना कुमारी को एक अलग ही रूहानी सुकून मिला था।