महंगाई का ‘मिसाइल’ अटैक! ईरान संकट से बिगड़ेगा भारत की GDP का गणित; क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर लगाएंगे आग?

Iran Israel War 2026 : नई दिल्ली (7 मार्च 2026): मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते युद्ध के बादलों ने भारत की आर्थिक सेहत के लिए चिंता बढ़ा दी है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें अचानक उछलकर 94 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचा, तो भारत में महंगाई और जीडीपी (GDP) के आंकड़ों पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है।

महंगाई पर सीधा प्रहार: 0.50% तक की हो सकती है वृद्धि
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में हर बढ़ोत्तरी सीधे देश के बजट पर असर डालती है।

HDFC बैंक का अनुमान: बैंक की इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो महंगाई 0.20% बढ़ सकती है। लेकिन अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो यह उछाल 0.50% से ज्यादा हो सकता है।

CPI का बढ़ा वेटेज: नई गणना पद्धति (CPI Series) में पेट्रोल और डीजल का वेटेज अब दोगुने से ज्यादा (4.8%) हो गया है। यानी तेल की कीमतों में जरा सा भी बदलाव आम आदमी की जेब पर अब पहले से कहीं ज्यादा भारी पड़ेगा।

GDP और ग्रोथ पर ‘ब्रेक’ लगने का खतरा
तेल की बढ़ती कीमतें केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि देश की विकास दर (Economic Growth) को भी धीमी कर सकती हैं।

RBI का विश्लेषण: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, यदि कच्चे तेल के दाम 10% बढ़ते हैं, तो देश की रियल GDP ग्रोथ में 0.15% की गिरावट आ सकती है।

सप्लाई चैन में बाधा: बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का मानना है कि लंबे समय तक तनाव रहने से सप्लाई चैन प्रभावित होगी, जिससे ग्रोथ 20-30 बेसिस पॉइंट तक गिर सकती है।

क्या जेब पर पड़ेगा बोझ? पेट्रोल-डीजल के दाम का हाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आम आदमी के लिए फ्यूल महंगा होगा?

राहत की उम्मीद: IDFC फर्स्ट बैंक की एक्सपर्ट गौरा सेनगुप्ता का कहना है कि सरकार फिलहाल रिटेल कीमतों में इजाफा न कर जनता को राहत दे सकती है। इसका भार सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अपने मार्जिन में कमी करके झेल सकती हैं।

सरकारी दखल की संभावना: केयरएज रेटिंग्स का मानना है कि अगर क्रूड 90 डॉलर के ऊपर टिका रहता है, तो सरकार को एक्साइज ड्यूटी घटाने या हस्तक्षेप करने की जरूरत पड़ सकती है।

करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का बढ़ता बोझ
भारत का आधा कच्चा तेल ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से होकर गुजरता है, जो युद्ध की वजह से सबसे ज्यादा खतरे में है। नोमुरा (Nomura) के अनुसार, तेल की कीमतों में हर 10% की बढ़ोत्तरी भारत के CAD (चालू खाता घाटा) को GDP के 0.4% तक बढ़ा देती है। इसका सीधा मतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो सकता है।

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