चारामा जनधारा संवाददाता
अनूप वर्मा
: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) द्वारा ‘सार्थक पीडीएस योजना’ के तहत राशन परिवहन, प्रबंधन और सार्वजनिक वितरण में स्वचालन के लिए ₹25,530 करोड़ के भारी-भरकम परिव्यय (बजट) की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन इस योजना ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले राशन विक्रेताओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। लंबे समय से अपने मानदेय यानी कमीशन को बढ़ाने की मांग कर रहे देश और प्रदेश के राशन विक्रेताओं में इस फैसले के बाद भारी असंतोष और आक्रोश पनप गया है।
10 पैसे की बढ़ोतरी: साढ़े 5 लाख परिवारों के साथ भद्दा मजाक
ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष रामदेव सिन्हा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खाद्य मंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
रामदेव सिन्हा ने आरोप लगाया कि:
”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट ने राशन दुकान संचालकों का मजाक उड़ाते हुए महज 10 पैसे प्रति किलोग्राम की मामूली बढ़ोतरी की है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता हर 6 महीने में बाजार भाव के हिसाब से बढ़ जाता है, वहीं दूसरी तरफ बरसों के लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद देश के साढ़े 5 लाख राशन विक्रेताओं व उनके परिवारों के साथ यह बेहद क्रूर और भद्दा मजाक है।”
’वन नेशन, वन राशन कार्ड’ तो फिर कमीशन में भेदभाव क्यों?
एसोसिएशन ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार देश में ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ का नारा देती है, तो फिर नियम के मुताबिक ‘एक देश, एक कमीशन’ भी होना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि एक ही काम के लिए केंद्र सरकार ₹90 कमीशन तय करती है, तो उसी काम के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार महज ₹30 कमीशन देकर राशन विक्रेताओं के पेट पर लात मार रही है। इसके विपरीत, देश के अन्य राज्यों में राशन विक्रेताओं को ₹150 से लेकर ₹200 प्रति क्विंटल तक का सम्मानजनक कमीशन दिया जा रहा है।
रमन सरकार की ‘वित्तीय पोषण राशि’ भी दो साल से बंद
राशन विक्रेताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2016 में छोटे दुकान संचालकों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक संबल देने के दृष्टिकोण से तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार ने ‘वित्तीय पोषण राशि’ जारी करने की व्यवस्था शुरू की थी। किंतु वर्तमान में पिछले दो वर्षों से इस वित्तीय पोषण राशि को बिना किसी पूर्व सूचना या कारण के सरकार ने बंद कर दिया है, जो कि बेहद चिंतनीय विषय है।
चाराम से शुरू हुई 125 किमी की ऐतिहासिक पदयात्रा को दबाने का आरोप
अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश भर के 14 हजार राशन विक्रेताओं ने पिछले साल 5 अक्टूबर 2025 को बस्तर संभाग के प्रवेश द्वार चारामा (जिला कांकेर) से एक ऐतिहासिक पदयात्रा शुरू की थी। हजारों की संख्या में राशन विक्रेता 125 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री निवास अपनी मांगें सौंपने जा रहे थे। परंतु, सरकार के नुमाइंदों ने प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल कर इस न्याय यात्रा को नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर ही रोक दिया। विक्रेताओं ने इसे सरकार की बड़ी नाकामी और तानाशाही करार दिया है।
वित्त मंत्री के पास अधर में लटका है प्रस्ताव
कमीशन विवाद पर संगठन ने बताया कि उनकी पदयात्रा और आंदोलन को संज्ञान में लेते हुए खाद्य सचिव रीना बाबा कंगाले द्वारा राज्यांश कमीशन बढ़ाने का एक बाकायदा प्रपोजल (प्रस्ताव) तैयार कर वित्त मंत्री को भेजा गया था। दुर्भाग्य की बात यह है कि यह प्रस्ताव आज तक मंत्रालय की फाइलों में दबा हुआ है और अधर में लटका है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सर्वे की भी अनदेखी
राशन विक्रेताओं ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष 2020 में 13 दिनों के देशव्यापी आंदोलन के बाद, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संयुक्त राष्ट्र (UN) के तहत कार्यरत एक स्वतंत्र संगठन ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ (World Food Programme) के जरिए एक सर्वे करवाया गया था। इस सर्वे की रिपोर्ट में खुद राशन विक्रेताओं के लिए ₹10 प्रति किलोग्राम कमीशन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन सरकार ने अपनी ही एजेंसी की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान: अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक विक्रेता कल्याण संघ ने साफ शब्दों में सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। संघ की मांग है कि राशन विक्रेताओं को सम्मान से जीने के लिए कम से कम ₹150 से ₹200 प्रति क्विंटल का कमीशन दिया जाना चाहिए। यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले समय में प्रदेश भर की राशन दुकानें बंद कर दी जाएंगी और राशन विक्रेता बेमियादी व अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जाने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
राशन दुकान संचालकों में भारी आक्रोश: 10 पैसे की मामूली बढ़ोतरी को बताया ‘क्रूर मजाक’, अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

02
Jun