रमेश गुप्ता
रायपुर : केंद्रीय जेल रायपुर में महिला बंदियों के सर्वांगीण सुधार और समाज की मुख्यधारा में उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित ‘निश्चय’ कार्यक्रम के अंतर्गत महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस विशेष प्रयास से जेल के भीतर ही उनके सम्मानजनक रोजगार और आजीविका की राह बेहद आसान हो गई है।
साठ महिला बंदियों को मिला अचार और मसाला निर्माण का विशेष प्रशिक्षण
केंद्रीय जेल रायपुर में विभिन्न मामलों में बंद साठ महिला बंदियों को बेसिक ऑफ पिकल यानी अचार एवं मसाला निर्माण के व्यावसायिक उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को इस काबिल बनाना है कि वे भविष्य में स्वयं की व्यावसायिक इकाई स्थापित कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान इन बंदियों को खाद्य उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ उनकी उत्तम गुणवत्ता बनाए रखने, स्वच्छता के कड़े मानकों का पालन करने, आकर्षक पैकेजिंग और सुरक्षित भंडारण से संबंधित सभी व्यावहारिक जानकारियां बारीकी से दी गईं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में ही नियमित रूप से अचार का व्यावसायिक निर्माण शुरू कर दिया है।

आस्था गृह उद्योग के जरिए मिल रहा बाजार और आत्मनिर्भरता की राह
जेल की महिला बंदियों द्वारा जेल के भीतर पूरी स्वच्छता के साथ आम, नींबू, गाजर और लहसुन जैसी विभिन्न वैरायटियों के स्वादिष्ट और हाइजीनिक अचार तैयार किए जा रहे हैं। इन बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री के लिए जेल प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। तैयार उत्पादों को केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था मुंगोडी सेंटर यानी आस्था गृह उद्योग स्टॉल और जेल कैंटीन के माध्यम से आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस बिक्री से होने वाली आय का एक निश्चित हिस्सा सीधे इन महिला बंदियों के खातों में जमा किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जेल केवल दंड का स्थान नहीं बल्कि सकारात्मक परिवर्तन का केंद्र है
इस सराहनीय और मानवीय पहल को लेकर केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी एक बड़ा केंद्र है। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में जेलों में चलाए जा रहे निश्चय कार्यक्रम के माध्यम से महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं। यह कौशल उन्हें आज आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीने और अपनी आजीविका अर्जित करने में बेहद सहायक सिद्ध होगा। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंदियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के रोजगारपरक और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे।