वैश्विक बाजार में पिछले छह हफ्तों के दौरान सोने की कीमतों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, दाम में आई इस कमी ने बाजार में खरीदारों और निवेशकों के लिए एक बेहतरीन मौका बना दिया है। लंबे समय के लिए निवेश करने वाले लोग इस गिरावट का फायदा उठाकर जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की चाल कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बदलावों पर निर्भर करेगी।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच बढ़ा भरोसा
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और दुनिया भर के बाजारों में मंदी की आशंका के कारण निवेशक एक बार फिर सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। हालांकि, इस बार युद्ध की वजह से कच्चे तेल के दाम भी बढ़े हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है। यही वजह है कि सोने के बाजार पर एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग का सकारात्मक असर दिख रहा है, तो दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरों का दबाव भी बना हुआ है।
अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों का असर
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी फेड दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या फिर इसमें एक और इजाफा कर सकता है। चूंकि सोने पर कोई निश्चित ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें ऊंची रहने और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव साफ देखा जा रहा है।
शादियों के सीजन से पहले सर्राफा बाजार में रौनक
सोने के दाम कम होते ही घरेलू सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है। जो ग्राहक पहले कीमतें बहुत ज्यादा होने के कारण खरीदारी टाल रहे थे, वे अब त्योहारों और शादियों के आगामी सीजन को देखते हुए बाजारों में पहुंचने लगे हैं। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि चांदी के मुकाबले फिलहाल ग्राहकों का ध्यान सोने की खरीदारी पर ज्यादा है, जिससे आने वाले दिनों में मांग में और इजाफा हो सकता है।