मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार को समाप्त हो गया। कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे 3 जुलाई से आदिवासी किसान अपना हक मांग रहे थे। प्रशासन ने रविवार तड़के भारी पुलिस बल के साथ पहुंचकर प्रदर्शन स्थल को खाली करवा लिया। 15 दिन से जारी इस आंदोलन में जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह जैसे कई अनोखे तरीके अपनाए गए थे।
आंदोलन की अगुवाई कर रही दिव्या अहिरवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रविवार सुबह 5 बजे पुलिस ने पहुंचकर कार्यकर्ताओं और नेता अमित भटनागर को हिरासत में ले लिया। दिव्या के मुताबिक, पुलिस की यह कार्रवाई केन-बेतवा प्रोजेक्ट में हुए 400 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार को दबाने के लिए की गई थी।
दूसरी ओर, एएसपी आदित्य पटले ने किसी भी गिरफ्तारी से साफ इनकार किया है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए सुरक्षित उनके गांवों में भेज दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल है और बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे सुरक्षा का खतरा था। साथ ही डॉक्टरों की टीम ने प्रदर्शनकारियों की जरूरी जांच भी की।
यह पूरा प्रदर्शन विस्थापन और पुनर्वास की मांगों को लेकर था। प्रभावित आदिवासियों का आरोप है कि जमीन, जंगल और आजीविका छीनने के बाद भी उन्हें उचित न्याय नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन पर डराने-धमकाने और झूठे केस दर्ज करने का आरोप भी लगाया।
वहीं सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इससे बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों को पानी मिलेगा और खेती में मदद होगी। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। फिलहाल धरना स्थल अब खाली है और प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।