चिखली डुबान क्षेत्र: प्रकृति की गोद में बसा छत्तीसगढ़ का ‘मिनी कश्मीर’, हजारों एकड़ में फैला मखमली घास का मैदान बना पर्यटकों की पहली पसंद

​धमतरी/चारामा:
भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग ठंडक और सुकून की तलाश कर रहे हैं, वहीं कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम तासी और धमतरी जिले के चिखली गांव का डुबान क्षेत्र इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गंगरेल बांध के बैकवाटर (डुबान क्षेत्र) के जलस्तर में कमी आने के बाद यहां एक ऐसा अद्भुत नजारा उभरकर सामने आया है, जिसे देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोग और पर्यटक अब इसे ‘चिखली’ के नाम से पुकार रहे हैं।


हजारों एकड़ में फैली मखमली हरी घास

इस पर्यटन केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यहां का अनंत तक फैला हरा-भरा मैदान है। बांध का पानी पीछे हटने के बाद हजारों एकड़ की इस उपजाऊ भूमि पर प्राकृतिक रूप से घनी और मखमली हरी घास उग आई है। एक तरफ नीले पानी की लहरें और दूसरी तरफ दूर-दूर तक फैली हरी चादर को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई कश्मीर या उत्तराखंड के बुग्यालों (घास के मैदानों) के बीच खड़ा हो। यह नजारा आंखों को सुकून देने के साथ-साथ इस भीषण गर्मी में भी ठंडक का अहसास करा रहा है।

सैकड़ों साल पुराना है इतिहास, इस वर्ष अचानक बढ़ा आकर्षण

ग्राम तासी और चिखली के बुजुर्ग व स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा करने पर एक दिलचस्प बात सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि यह मैदान कोई नया नहीं है, बल्कि जब से यह गांव बसा है, यानी सैकड़ों-हजारों सालों से यह मैदान अस्तित्व में है। हर साल पानी घटने पर यहां ऐसी ही हरियाली छाती है, लेकिन इस वर्ष सोशल मीडिया के माध्यम से यह जगह अचानक इतनी अधिक लोकप्रिय हो गई है कि इसने एक बड़े पर्यटन केंद्र का रूप ले लिया है।

वाहनों के रेले से लग रहा जाम, बुनियादी सुविधाओं की कमी

वर्तमान में इस स्थल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में दोपहिया और चार पहिया वाहन पहुंच रहे हैं। अचानक बढ़े इस भारी ट्रैफिक के कारण क्षेत्र में आए दिन जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। संकरी सड़कों और व्यवस्थित पार्किंग न होने के कारण पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ओनाकोना मंदिर सहित धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन का बड़ा हब बनने की क्षमता


​ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा बेल्ट केवल प्राकृतिक सुंदरता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद समृद्ध है। इस डुबान क्षेत्र से लगा हुआ प्रसिद्ध उनाकोना मंदिर है, और इसके साथ ही डूब क्षेत्र के आसपास कई अन्य प्राचीन और भव्य मंदिर स्थित हैं। यदि सरकार इस पूरे कॉरिडोर को एक साथ जोड़कर योजनाबद्ध तरीके से काम करे, तो यह छत्तीसगढ़ का एक बहुत बड़ा पर्यटन हब बन सकता है।


​ग्रामीणों ने सरकार से की व्यवस्थित विकास और सड़कों के निर्माण की मांग


​बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए क्षेत्र के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि:
​चौड़ी सड़कों का निर्माण: पर्यटकों के सुगम आवागमन के लिए मुख्य मार्गों से लेकर डूब क्षेत्र तक की सड़कों को दुरुस्त और चौड़ा किया जाए।
​पर्यटन स्थल के रूप में विकास: पूरे क्षेत्र को बकायदा पर्यटन स्थल के रूप में नोटिफाई कर यहां बुनियादी सुविधाएं जैसे शेड्स, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं।


​रोजगार के अवसर: यदि सरकार इसे व्यवस्थित रूप से विकसित करती है, तो स्थानीय युवाओं को गाइड, फोटोग्राफी, खान-पान की दुकानें और अन्य व्यवसायों के माध्यम से स्थाई रोजगार मिलेगा, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
​रिपोर्ट: अनूप वर्मा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *