बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर: TMC के 20 बागी सांसदों ने NCPI में किया विलय, जानें कौन हैं इस गुमनाम पार्टी के कर्ता-धर्ता

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने सामूहिक रूप से ‘नेशनल सिटीजन पार्टी’ (NCPI) में अपना विलय कर लिया है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद अचानक एक गुमनाम सी पार्टी NCPI देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा है, जिसमें संसद सदन में अपने लिए अलग से बैठने की व्यवस्था करने की मांग की गई है।

इस बगावत के बाद हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर अचानक चर्चा में आई NCPI का मालिक कौन है और इसे कौन चलाता है।

मोटिवेशनल स्पीकर से लेकर मैथ टीचर तक संभाल रहे कमान
चुनावी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के मुताबिक, नेशनल सिटीजन पार्टी (NCPI) की कमान मुख्य रूप से एक ही परिवार और उनके करीबियों के हाथ में है:

अध्यक्ष (शिउली कुंडू): NCPI की राष्ट्रीय अध्यक्ष शिउली कुंडू हैं। वे राजनीति के साथ-साथ ‘जागो विश्व’ नामक एक साप्ताहिक बंगाली समाचार-पत्र में उप-संपादक (Sub-editor) के रूप में काम करती हैं।

उपाध्यक्ष (उत्तिया कुंडू): शिउली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, उत्तिया एक मोटिवेशनल स्पीकर, गणित के शिक्षक और आईएसओ (ISO) ऑडिटर हैं। वे ‘जागो विश्व’ समाचार-पत्र के सचिव भी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ भी देखी गई है, जिसे उन्होंने 10 मई को पोस्ट किया था।

संगठन सचिव (शांतनु डे): पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में शांतनु डे संगठन सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

त्रिपुरा चुनाव से हुई थी शुरुआत, मिला था बेहद मामूली वोट
NCPI चुनाव आयोग में एक पंजीकृत (Registered) लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसका मुख्य कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर में स्थित है। इस पार्टी का गठन साल 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया था। तब पार्टी ने महज दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जहां उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 822 वोट ही नसीब हुए थे। चुनाव रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक केवल 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला है।

इतने छोटे राजनीतिक वजूद वाली पार्टी में टीएमसी के 20 सांसदों का विलय करना पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े भूचाल से कम नहीं माना जा रहा है।

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