रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी खरीदी की पुरानी केंद्रीकृत व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इसके बाद वे अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार स्थानीय स्तर पर साड़ी खरीद सकेंगी।
मंत्री राजवाड़े ने यह निर्णय हाल ही में साड़ी खरीदी को लेकर सामने आए मुद्दों की समीक्षा के बाद लिया है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए हैं कि साड़ी की डिजाइन पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श कर तय की जाए। साथ ही साड़ी के कपड़े को लेकर किसी तरह की बाध्यता नहीं रखी जाएगी। कॉटन, सिंथेटिक या अन्य कपड़े का चयन कार्यकर्ताओं की सुविधा के अनुसार होगा।

नई व्यवस्था के तहत विभाग साड़ी की डिजाइन अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएगा और यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली पूरी राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में हस्तांतरित की जाएगी। इससे खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को अपनी जरूरत के अनुसार साड़ी चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थाओं की समीक्षा कर जरूरी सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बहनें बाल विकास योजनाओं की अहम कड़ी हैं और उनके हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
गौरतलब है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को कार्य की पहचान और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए प्रत्येक यूनिफॉर्म पर अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है।