प्रशासन की चुप्पी, जनता बेहाल: रेत माफिया के आतंक से दलदल में तब्दील हुई सड़कें

चारामा

​विकासखंड के महानदी के घाटों से इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर रेत का अवैध और बेतहाशा उत्खनन जारी है। इस कारोबार ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि आम जनजीवन को भी नर्क बना दिया है।

​सड़कों पर बह रहा ‘पानी’, उड़ रही ‘धूल’
​रेत से लदे ओवरलोड ट्रक और ट्रैक्टर महानदी घाटों से दिन-रात गुजर रहे हैं। गीली रेत से भरा होने के कारण इन वाहनों से लगातार पानी सड़कों पर गिरता रहता है। इस वजह से पक्की सड़कें अब कीचड़ और मलबे के ढेर में बदल चुकी हैं। डामर की सड़कें, जो कभी आवागमन का मुख्य साधन थीं, अब भारी वाहनों के पहियों तले दबकर पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और ‘दलदल’ का रूप ले चुकी हैं।नगर से महानदी के उस पर बसें गांव को जोड़ने वाली डामर सडक पूरी तरह दलदली सडक में बदल गई हैं।

​राहगीरों के लिए बना ‘जानलेवा’ सफर
​सड़कों की हालत इतनी खस्ता है कि पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो गया है।सडक की डामर पूरी तरह उखड चुकी हैं, और कीचड़ की सडक बन चुकी हैं. आए दिन लोग कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। भारी वाहनों के दबाव से सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

​प्रशासन का ‘मौन’ और जनता का ‘आक्रोश’
​हैरानी की बात यह है कि सड़कों की यह दुर्दशा और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। ऐसा लगता है जैसे प्रशासन ने रेत माफियाओं को खुली छूट दे रखी है।”सड़क अब सड़क नहीं रही, यह दलदल बन चुकी है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और बुजुर्गों का घर से निकलना बंद हो गया है। अगर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आमंजनता को चक्का जाम करने को मजबूर होना पड़ेगा, प्रशासन अवैध परिवहन पर रोक लगाकर और सड़कों की तत्काल मरम्मत कराये।

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