भागवत कथा के छठवें दिन व्यास पीठ से देव कृष्ण महाराज ने रुक्मणी विवाह के कथा श्रवण कराया

सक्ती ,रामपुर । में ठाकुर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें व्यास पीठ से देव कृष्ण महाराज द्वारा महारास, कंस, वध, रुक्मणी विवाह का प्रसंग भक्तगणों को श्रवण करते हुए कहा भगवान श्री कृष्ण धरती से पाप का भार उतारने दिव्य लीला करते हुए कृत संकल्पित होकर जल ,फल और थल इन तीनों को ही मुक्त किए । यमुना नदी के कालिदाह विषधर कालिया नाग को बाहर निकाल कर रमणक द्वीप भेज दिया । तालवन में धेनुकासुर नाम के दानव ने अपना कब्जा कर लिया था जिसे बलराम जी के हाथों वध करवा के जंगल के फलों को मुक्त किया और भौमासुर नाम का दाना होगा सारी धरती को अपने कब्जे में कर रहा था जिसका वध कर श्री कृष्ण ने धरती को भी मुक्त किया ।


श्रीमद् भागवत की कथा में वर्तमान भारत की अनेक परिस्थितियों का समाधान छिपा हुआ है आज भी जल जंगल और जमीन का अभियान दिखाई दे रहा है ।श्रीमद् भागवत की कथा व्यक्ति समाज और राष्ट्र निर्माण का प्रेरणा देता है। गोवर्धन लीला करते हुए श्री कृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र की नहीं बल्कि प्रकृति की पूजा करने हेतु प्रेरित किया और बताया कि जब तक धरती में हरियाली रहेगी तब तक ही धरती में वर्षा होगी और मनुष्य समाज तथा प्राणी इस संसार में रह सकेंगे ।
श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन व्यास पीठ से पंडित देव कृष्ण शर्मा ने श्रोताओं को बताया कि श्री कृष्णा साक्षात पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर है जिनकी 64 कलाएं भी हैं वह इस धरती पर संदेश वाहक बनकर नहीं आए बल्कि संपूर्ण प्रभुत्व और ऐश्वर्य के साथ दिव्य लीलाएं की । विदर्भ देश के राजकुमारी रुक्मणी का हरण हजारों बलशाली राजा महाराजाओं के बीच से किया और अपनी प्रथम पटरानी बनाया । श्री कृष्ण के वंश विस्तार की कथा भी आश्चर्य में डालने वाली है । भागवत की कथा का एक ही अभिप्राय है कि श्रोता भागवत पारायण बनते हैं और अपनी ही इन नियती से उनकी भेंट होती है । श्री कृष्ण की कथा से जीवन की व्यथा दूर होती है और भगवान के श्री चरणों के प्रति मनुष्यों का अनुराग भी होता है ।
रामपुर के ठाकुर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन कथा श्रवण के साथ आयोजक परिवार को मंगल कामना प्रदान करने भागवत आचार्य राजेंद्र महाराज , श्रीमती करुणा , श्रीमती पूनम शर्मा रामनारायण गौतम । तथा आसपास के ग्रामों व नगरों से सैकड़ो श्रोता कथा श्रवण सत्संग एवं संकीर्तन महाआरती कर पुण्य का लाभ लिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *