दूरस्थ गांव में मिली 1755 की अनमोल धरोहर, कलेक्टर ने खुद किया डिजिटल संरक्षण

‘ज्ञान भारतम’ अभियान को मिली नई दिशा, भोजपत्र पर लिखी सदियों पुरानी पांडुलिपि बनी आकर्षण का केंद्र

कोरिया, 23 अप्रैल 2026/ जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक अहम पहल के तहत कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी आज सोनहत ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम केशगंवा पहुंचीं, जहां उन्होंने वर्ष 1755-56 की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि का अवलोकन किया। भोजपत्र और कपड़े पर अंकित इस पांडुलिपि को मौके पर ही ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण’ ऐप पर डिजिटल रूप से अपलोड किया गया।

यह पांडुलिपि पंडित रघुवर प्रसाद शर्मा एवं प्रकाश शर्मा के परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखी गई है। परिवार ने बताया कि यह धरोहर उनके पूर्वजों के समय से विरासत के रूप में संरक्षित है और इसकी पूजा भी की जाती है। पांडुलिपि में प्राचीन सनातनी मंत्र, ऐतिहासिक दस्तावेज, नक्शे, प्रशासनिक अभिलेख, निमंत्रण पत्र और उत्सवों से जुड़े विवरण शामिल हैं, जो उस समय की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक प्रस्तुत करते हैं।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने इस धरोहर को इतने वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए परिवार की सराहना करते हुए कहा कि यह जिले की समृद्ध परंपरा और ज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन को अवश्य दें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ज्ञान भारतम’ सर्वेक्षण पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे पांडुलिपियों के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मूल दस्तावेज संबंधित व्यक्ति के पास सुरक्षित रहेंगे, जबकि उनकी डिजिटल स्कैनिंग या प्रतिलिपि तैयार कर संरक्षित किया जाएगा। इस सर्वे कार्य मे वाल्मीकि दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने इस काम को लगातार कर रहे हैं।

प्रशासन द्वारा इस अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि जिले की बिखरी हुई ऐतिहासिक धरोहर को एक मंच पर लाकर सुरक्षित किया जा सके।

स./मानिकपुरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *