अमरकोट में गूंजा श्रीराम नाम का जयघोष, पर्वतदान और 11 लाख मंत्र जाप के साथ संपन्न हुआ भव्य महायज्ञ

सरायपाली (छत्तीसगढ़): सरायपाली के पास स्थित ग्राम श्रीधाम अमरकोट में भक्ति और आध्यात्म का एक ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने पूरे क्षेत्र को राममय कर दिया। श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय “श्री राम लोक-कल्याण महायज्ञ एवं भव्य श्री राम कथा” का ऐतिहासिक समापन हुआ। 11 से 16 जनवरी तक चले इस आयोजन में न केवल आस्था की गंगा बही, बल्कि 11 लाख से ज्यादा बार श्रीराम मंत्र के अखंड जाप ने एक दुर्लभ कीर्तिमान भी स्थापित किया।

11 लाख मंत्र जाप और सामूहिक अनुष्ठान

इस महायज्ञ की सबसे खास बात ‘श्रीराम नाम मंत्र’ का अखंड जाप रहा। आचार्य पद्मलोचन महाराज की देखरेख में भक्तों ने 1,111,111 (ग्यारह लाख ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह) बार भगवान राम के नाम का जाप किया। इसके साथ ही रामचरित मानस के प्रथम श्लोक से लेकर अंतिम दोहे तक का महाहवन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में 111 बार सुंदरकांड, 111 बार विष्णु सहस्रनाम और 1111 बार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ व आहुति दी गई, जो अपने आप में एक अद्भुत दृश्य था।

पर्वतदान और संगीतमयी राम कथा का आकर्षण

महोत्सव के दौरान ‘पर्वतदान’ जैसा महापुण्यकारी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसे देखने और पुण्य कमाने के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे थे। माहौल को और भी भक्तिमय बनाने के लिए संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन हुआ, जिसमें भजनों और प्रसंगों को सुनकर भक्त भाव-विभोर हो उठे। यह पूरा आयोजन किसी बड़े धार्मिक मेले जैसा नजर आ रहा था, जहां चारों तरफ सिर्फ श्रद्धा और उल्लास का वातावरण था।

जनकल्याण और विकास का संकल्प

आचार्य पद्मलोचन महाराज ने बताया कि इस विराट आयोजन का मुख्य उद्देश्य अमरकोट सहित पूरे क्षेत्र और राज्य का सर्वांगीण विकास, सुख-शांति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के पुनर्जागरण का महायज्ञ है। हजारों श्रद्धालुओं की एक साथ उपस्थिति और वेदमंत्रों की गूंज से निकलने वाली दैवीय ऊर्जा पूरे वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाती है।

ग्रामवासियों की एकजुटता से सफल हुआ आयोजन

इस विशाल आयोजन की मुख्य यजमान दुष्यंत चन्द्रावती पटेल थीं। कार्यक्रम की सफलता में समस्त ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा। ग्रामीणों की सेवा और अटूट श्रद्धा की वजह से ही इतना बड़ा आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सका। समापन के अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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