रमेश गुप्ता : दुर्ग/भिलाई। साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दुर्ग पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराकर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल तथा पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर थाना उतई क्षेत्र के अंतर्गत संचालित IDFC First Bank के कई खातों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि विभिन्न साइबर ठगी मामलों से प्राप्त रकम कुछ संदिग्ध खातों में जमा हुई थी, जिनका उपयोग “म्यूल अकाउंट” के रूप में किया जा रहा था।
पुलिस जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम प्राप्त कर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर एवं आहरित किया गया, जिससे खाताधारकों द्वारा अवैध आर्थिक लाभ कमाया गया। मामले में 30 संदिग्ध खाताधारकों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 246/2026 के तहत धारा 318(2), 318(3) एवं 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान बैंक से प्राप्त केवाईसी दस्तावेज, खाता विवरण और ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट का परीक्षण किया गया। जांच में आरोपियों के खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध और अनाधिकृत लेन-देन पाए गए।
पुलिस ने भूपेन्द्र हिरवानी (23 वर्ष), सुपेला, नवलेश्वर पाटले (35 वर्ष), संजय नगर, सुपेला, पवन सिंह (32 वर्ष), प्रगति नगर, कैंप-1, भिलाई, आकाश चन्द्राकर (37 वर्ष), मैत्रीनगर, रिसाली, अर्पण शुक्ला (23 वर्ष), तितुरडीह, दुर्ग और मुकेश सिंह (23 वर्ष), सेक्टर-7 निवासी आरोपियों की पहचान कर 16 जून को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम अन्य व्यक्तियों को साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन के लिए उपलब्ध कराए थे, जिसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ था। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल सिम या बैंकिंग संबंधी जानकारी उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना साइबर अपराध में सहभागिता माना जा सकता है और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। इस कार्रवाई में एसीसीयू टीम एवं थाना उतई के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।