सफलता की कहानी: जिले में बढ़ी सिंचाई की क्षमता… 23 योजनाओं को मिली स्वीकृति… 3374 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

वित्तीय वर्ष 2024-25 : 17 योजनाएं, 5996.43 लाख की लागत


2024-25 में स्वीकृत 17 सिंचाई योजनाओं से 21 गांवों की 2350 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस वर्ष मुख्य रूप से जलाशयों, नहरों, पक्के चैनलों, एनीकट, स्टापडेम व काजवे निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ ही पुराने जल संरचनाओं को मजबूत बनाएंगे। इन योजनाओं में तिरकेला, तुर्रापानी, सायर और कोट जलाशय योजनाओं के जीर्णोद्धार कार्य प्रमुख हैं। इसके साथ ही 13 अन्य एनीकट एवं स्टापडेम परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनसे खरीफ और रबी दोनों सीजन में सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 : 06 योजनाएं, 2152.08 लाख की लागत
2025-26 में विभाग को 06 नई योजनाओं की स्वीकृति मिली है, जिनकी कुल लागत 2152.08 लाख रुपये है। इनसे 09 गांवों की 1024 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। प्रमुख परियोजनाओं में घाघारिया व्यपवर्तन, कुंवरनाला स्टापडेम, पंडरीडांड जलाशय नहर जीर्णोद्धार, घंघरी एनीकट, जजगा गोठान एनीकट एवं डांडगांव जलाशय सुधार कार्य शामिल हैं।

इन योजनाओं से किसानों को खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में स्थायी सिंचाई उपलब्ध होगी और पुरानी संरचनाएं नई क्षमता के साथ पुनर्जीवित होंगी।

शासन का लक्ष्य-सिंचाई क्षमता का विस्तार एवं कृषि वृद्धि
कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन संभाग क्रमांक-1, अम्बिकापुर ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में विभाग का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए अधिकतम भूमि को सिंचाई के दायरे में लाना है। सभी स्वीकृत योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

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