नई दिल्ली। पंद्रह मई को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत से एक ऐसी टिप्पणी आई जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया। उस सुनवाई के दौरान अदालत ने बेरोजगार युवाओं को लेकर एक ऐसी बात कही जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। इस एक बयान ने युवाओं के बीच गुस्से की एक ऐसी चिंगारी भड़काई, जिसने आगे चलकर देश के शिक्षा मंत्री को भी अपनी कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
मई महीने में आई इस टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके नाम के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर एक नया अभियान शुरू किया। उन्होंने इसे एक व्यंग्य का रूप देते हुए एक नया मंच तैयार किया। कुछ ही दिनों में इंटरनेट पर इस मुहिम से करोड़ों लोग जुड़ गए। चारों तरफ इसी बात की चर्चा होने लगी और रातों-रात मीम्स और पोस्टरों का दौर शुरू हो गया।
नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी से पहले से ही छात्र और युवा गुस्से में थे। अदालत की इस टिप्पणी और सोशल मीडिया के इस नए आंदोलन ने मिलकर युवाओं को सड़क पर उतरने के लिए प्रेरित किया। बीस जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। इस प्रदर्शन ने ऐसा उग्र रूप लिया कि सरकार को भी झुकना पड़ा और आखिरकार शिक्षा मंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा।
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत पंद्रह मई को अदालत की टिप्पणी से हुई थी। इसके अगले ही दिन सोशल मीडिया पर नया मंच बना और चार जून को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। छह जून को दिल्ली में प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद बीस जून से जंतर-मंतर पर धरना शुरू हुआ। इस बीच कई बड़े नाम भी इस मुहिम से जुड़ते चले गए। आखिरकार छब्बीस दिनों के लंबे संघर्ष और सरकार के साथ कई दौर की बैठकों के बाद पच्चीस जुलाई को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आया, जिसे इस आंदोलन की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।