31 जुलाई के बाद लग सकता है जुर्माना, बैंक लोन से लेकर टैक्स रिफंड तक पड़ सकता है असर
रमेश गुप्ता
भिलाई। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही कर विशेषज्ञों ने करदाताओं को समय रहते रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी है। अधिवक्ता राजकिशोर गुप्ता और अधिवक्ता उमा बंछोर का कहना है कि अंतिम समय तक इंतजार करना कई बार आर्थिक नुकसान और तकनीकी परेशानियों का कारण बन सकता है। उन्होंने पात्र करदाताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल कर कानूनी दायित्वों का पालन करने की अपील की है।
अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग अंतिम तिथि
अधिवक्ता राजकिशोर गुप्ता के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर-1 से आईटीआर-4 तक के गैर-ऑडिट मामलों में आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। वहीं जिन मामलों में ऑडिट आवश्यक है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है। उन्होंने कहा कि करदाता अपनी श्रेणी के अनुसार समय-सीमा का ध्यान रखें।
देरी पड़ सकती है महंगी
समय सीमा समाप्त होने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत 1,000 रुपए से 5,000 रुपए तक का विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कर देय होने की स्थिति में ब्याज का भुगतान भी करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर रिटर्न दाखिल कर इन अतिरिक्त वित्तीय भारों से आसानी से बचा जा सकता है।
समय पर आईटीआर भरने से मिलते हैं कई फायदे
कर विशेषज्ञों के अनुसार समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करने से केवल कानूनी अनुपालन ही नहीं होता, बल्कि बैंक ऋण, गृह ऋण, वाहन ऋण, वीजा आवेदन और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में भी सुविधा मिलती है। यदि किसी करदाता का टैक्स रिफंड बनता है तो समय पर रिटर्न भरने से उसकी प्रक्रिया भी जल्दी पूरी हो जाती है। भविष्य में आय संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य वित्तीय जरूरतों के दौरान भी आईटीआर महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में काम आता है।
रिटर्न भरने से पहले रखें ये दस्तावेज तैयार
रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाता अपने पैन कार्ड, आधार कार्ड, फॉर्म-16, बैंक खाते का विवरण, टीडीएस की जानकारी, निवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य आय के प्रमाण व्यवस्थित कर लें। सही जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करने से त्रुटियों और संशोधन की आवश्यकता कम हो जाती है।
आखिरी दिनों की भीड़ से बचें
अधिवक्ता उमा बंछोर ने कहा कि अंतिम दिनों में आयकर पोर्टल पर उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने से तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने में अनावश्यक विलंब और असुविधा हो सकती है। इसलिए करदाताओं को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।
जागरूक नागरिक होने का भी दायित्व
दोनों अधिवक्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि आयकर रिटर्न दाखिल करना केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक होने का भी परिचायक है। उन्होंने दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के सभी पात्र करदाताओं से अपील की कि वे अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित समय-सीमा से पहले रिटर्न दाखिल कर भविष्य की वित्तीय और कानूनी परेशानियों से बचें। साथ ही समय पर आईटीआर भरकर अपने वित्तीय रिकॉर्ड को भी मजबूत बनाए रखें।