फर्जी डिग्री और संगीन अपराध, यूपी के वकीलों पर हाई कोर्ट सख्त

उत्तर प्रदेश में वकीलों की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में करीब 4,157 वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इतना ही नहीं, जांच में 105 वकीलों की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए हैं और अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की है।

सबसे खराब हाल राजधानी के वजीरगंज का

कोर्ट के सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 5 लाख से ज्यादा पंजीकृत वकीलों में से हजारों के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। अकेले लखनऊ के वजीरगंज थाने में 422 वकीलों के खिलाफ 236 केस दर्ज हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि 28 वकील ऐसे हैं जिन पर 11 या उससे अधिक मुकदमे हैं, जबकि एक वकील के खिलाफ तो 46 मामले दर्ज मिले हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ जिलों में लॉ ग्रेजुएट्स के संगठित गिरोह काम कर रहे हैं, जो डराने-धमकाने और अवैध कब्जे जैसे कामों में लिप्त हैं।

हाई कोर्ट के सख्त निर्देश

न्यायालय ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। अब गंभीर अपराधों में आरोपित वकीलों के मुकदमे उनके गृह जिले से हटाकर दूसरे जिले में स्थानांतरित किए जाएंगे। इसके अलावा:

फर्जी डिग्री वाले 105 वकीलों के खिलाफ तत्काल धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज होगी। गंभीर मामलों में आरोपित वकीलों की प्रैक्टिस उनके मामले के निपटारे तक निलंबित रहेगी। वकील बनने के लिए अब पुलिस सत्यापन की व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा। हर महीने डीएम, एसएसपी और जिला जज मिलकर इन मामलों की समीक्षा करेंगे।

कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालयों के साथ तालमेल बिठाकर डिग्री का तुरंत सत्यापन हो और हर साल वकील अपने ऊपर दर्ज मुकदमों का शपथपत्र दें। यह कदम न्यायिक प्रणाली की गरिमा को बनाए रखने और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। अब सभी की निगाहें 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

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