डिजिटल हेल्थ ऐप बदलेंगे जिंदगी, जानिए इमरजेंसी मेडिकल आईडी और दवा रिमाइंडर के फायदे

स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके सेहत से जुड़े फीचर्स का उपयोग बहुत कम लोग करते हैं। गूगल, सैमसंग और एपल जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन में बेहतरीन डिजिटल हेल्थ ऐप दिए हैं। इन ऐप्स की मदद से लोग दवा का रिमाइंडर, मेडिकल रिकॉर्ड और इमरजेंसी आईडी जैसी जरूरी जानकारियां एक ही जगह सुरक्षित रख सकते हैं। तकनीकी रूप से सजग उपभोक्ता अब इन टूल्स का उपयोग करके अपनी सेहत की निगरानी घर बैठे ही कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।

इन ऐप्स के भीतर कई महत्वपूर्ण फीचर्स मिलते हैं, जिनमें सबसे जरूरी ‘इमरजेंसी मेडिकल आईडी’ है। इस आईडी में उपयोगकर्ता अपना ब्लड ग्रुप, एलर्जी, पुरानी बीमारी, नियमित दवाएं और आपातकालीन संपर्क नंबर दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होता है, तो फोन लॉक होने पर भी राहतकर्मी लॉक स्क्रीन से यह जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा इसमें दवा का रिमाइंडर सेट करने की सुविधा है, जिससे समय पर नोटिफिकेशन मिलता है। इसमें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के मरीज अपनी दवाओं का पूरा इतिहास देख सकते हैं।

ब्लड टेस्ट और स्कैन रिपोर्ट एक जगह

पारंपरिक रूप से लोग अपने मेडिकल पर्चे, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और एक्स-रे जैसी जरूरी चीजें ईमेल या वॉट्सएप चैट में बिखरी रखते थे। आपातकाल के समय इन दस्तावेजों को ढूंढना बेहद मुश्किल काम होता था। इसी समस्या को देखते हुए टेक कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन में एक केंद्रीय स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की। आईफोन में ‘एपल हेल्थ’, एंड्रॉइड में ‘गूगल हेल्थ’ और सैमसंग फोन में ‘सैमसंग हेल्थ’ के नाम से यह सेवा पहले से मौजूद है। ये सभी प्लेटफॉर्म मुफ्त हैं और इनके प्रमुख फीचर्स के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता है।

इन ऐप्स में डेटा पूरी तरह सुरक्षित

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डिजिटल सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इन ऐप्स में डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीज का ब्लड ग्रुप और एलर्जी की जानकारी डॉक्टरों को तुरंत सही इलाज शुरू करने में मदद करती है। एंड्रॉइड और आईफोन दोनों ही प्लेटफॉर्म पर प्रोफाइल बनाकर स्टेप ट्रैकिंग को आसानी से चालू किया जा सकता है। उपयोगकर्ता अपने दैनिक जीवन की आदतों जैसे पानी पीना, नींद का समय, वजन में बदलाव और मानसिक स्थिति को भी इसमें दर्ज कर सकते हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव

इस व्यवस्था के व्यापक स्तर पर अपनाने से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मरीजों को अब भारी-भरकम फाइलें लेकर डॉक्टरों के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। बाजार में अब स्मार्टवॉच और अन्य पहनने योग्य उपकरणों की मांग बढ़ रही है, जो इन ऐप्स के साथ सीधे जुड़ जाते हैं। आने वाले समय में स्वास्थ्य बीमा कंपनियां भी इन आंकड़ों के आधार पर प्रीमियम तय करने की दिशा में विचार कर सकती हैं, जिससे आम लोगों को वित्तीय लाभ मिल सकता है।

निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि स्मार्टफोन के हेल्थ फीचर्स जीवन बचाने वाले साबित हो सकते हैं। जरूरत केवल इस बात की है कि लोग इनके प्रति जागरूक हों और अपनी सही जानकारी दर्ज करें। भविष्य में इन ऐप्स में सरकारी स्वास्थ्य पहचान पत्र को जोड़ने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं, जिससे चिकित्सा प्रणाली और अधिक सरल हो जाएगी।

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