रमेश गुप्ता
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने शनिवार को दुर्ग प्रवास के दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं, जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के प्रस्तावित निजीकरण और कांग्रेस संगठन को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि राज्य में अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी चिंता का विषय है। उनका आरोप था कि सरकार अपराधियों में कानून का भय पैदा करने वाला माहौल बनाने में सफल नहीं रही है।
मोतीलाल वोरा परिवार से पुराने संबंध, दी श्रद्धांजलि
मीडिया से बातचीत की शुरुआत उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय मोतीलाल वोरा की धर्मपत्नी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने कहा कि वोरा परिवार से उनका वर्षों पुराना आत्मीय संबंध रहा है और उन्हें हमेशा परिवार से मातृत्व का स्नेह एवं अपनापन मिला। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
फोटो विवाद पर बोले— हर व्यक्ति को पहचानना संभव नहीं
हाल के फोटो विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जानकारी होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बाद में कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में आरोपी पाया जाता है तो इसका यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि उससे जानबूझकर संबंध रखा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी से जानबूझकर संबंध रखना पूरी तरह अनुचित है।
‘कांग्रेस की आधिकारिक सोच नहीं’
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान को कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार कांग्रेस ने कभी इस प्रकार की सोच का समर्थन नहीं किया है और पार्टी की नीति स्पष्ट रूप से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है।
कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में चाकूबाजी, दुष्कर्म, छेड़छाड़ और हिंसक घटनाओं जैसी वारदातें लगातार सामने आ रही हैं। उनका कहना था कि सरकार हर अपराध को पूरी तरह रोक नहीं सकती, लेकिन ऐसा वातावरण अवश्य तैयार कर सकती है जिससे अपराधियों में कानून का भय बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इस दिशा में अपेक्षित परिणाम देने में असफल रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर जताई चिंता
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं और संसाधनों को सुदृढ़ बनाने पर ध्यान चाहिए, ताकि आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण इलाज आसानी से उपलब्ध हो सके।
उन्होंने ‘हमर लैब’ जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को यूनिवर्सल हेल्थ केयर की अवधारणा को मजबूत करना चाहिए, जिससे नागरिकों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च न करना पड़े। उनका आरोप था कि सरकारी संसाधनों को निजी संस्थाओं को सौंपने से आम मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की चर्चा पर दिया जवाब
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि वह किसी पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उन्होंने स्वयं को पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि संगठन जो भी जिम्मेदारी देगा, उसका निर्वहन करेंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली प्रवास के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि पार्टी नेतृत्व का वर्तमान फोकस उन राज्यों पर है, जहां वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। छत्तीसगढ़ संगठन को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के निजीकरण का किया विरोध
भिलाई के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के प्रस्तावित निजीकरण पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस अस्पताल की स्थापना आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यदि सरकारी अस्पतालों और उनकी परिसंपत्तियों को निजी हाथों में सौंपा जाएगा तो इलाज का खर्च आम लोगों के लिए और अधिक बढ़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में यूनिवर्सल हेल्थ केयर का उद्देश्य नागरिकों को बिना आर्थिक बोझ के स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जबकि वर्तमान नीतियां इसके विपरीत दिखाई देती हैं। साथ ही उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम से जुड़े संस्थान के निजीकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।