नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में 18 बड़े फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इस बैठक में व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
दोनों देशों ने अपने संबंधों को अब स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने का फैसला किया है। साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर करीब 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों को मिली नई दिशा
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच इस वर्ष रिकॉर्ड समय में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा हुआ है। इससे व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
1.72 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान
बैठक के दौरान न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 1.72 लाख करोड़ रुपये यानी 20 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया। यह निवेश विभिन्न क्षेत्रों में किया जाएगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोजगार, बुनियादी ढांचे और उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी।
व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिलेंगे और आर्थिक सहयोग मजबूत होगा।
40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा
यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का दौरा किया है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी वहां गए थे।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी 6 से 11 जुलाई तक चली तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे। ऑकलैंड में वह 40 हजार से अधिक भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद वह भारत लौटेंगे।
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग?
बैठक के दौरान व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा, कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।