ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष 14 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कि Guru Asta का मेष, वृषभ और मिथुन राशि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
मेष राशि: स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु इस समय चौथे भाव में गोचर कर रहे हैं। करियर और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि गुरु अस्त की अवधि में स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाव जरूरी रहेगा। नियमित दिनचर्या अपनाएं और खान-पान पर विशेष ध्यान दें। मेहनत का पूरा फल मिलने में थोड़ा समय लग सकता है, इसलिए धैर्य बनाए रखें।
वृषभ राशि: यात्रा के दौरान बरतें सावधानी
वृषभ राशि के लिए गुरु तीसरे भाव में स्थित हैं। इससे साहस और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। इस दौरान छोटी और लंबी यात्राओं के योग बन सकते हैं।
वहीं गुरु की दृष्टि आठवें भाव पर होने से अचानक होने वाले बदलाव या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की संभावना भी मानी गई है। किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचें और कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अच्छा तालमेल बनाए रखें।
मिथुन राशि: धन लाभ के साथ रखें वाणी पर संयम
मिथुन राशि के लिए गुरु दूसरे भाव में गोचर कर रहे हैं। यह स्थिति धन, परिवार और वाणी से जुड़े मामलों में सकारात्मक मानी जाती है। आय बढ़ने के योग बन सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है।
हालांकि गुरु अस्त रहने के दौरान परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए बातचीत में संयम रखें। किसी बड़े निवेश या आर्थिक फैसले से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
गुरु अस्त के दौरान क्या करें
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, चना दाल, हल्दी या अन्य पीली वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शुभ फलदायी माना गया है।
इन बातों का रखें ध्यान
गुरु अस्त का समय घबराने का नहीं, बल्कि सतर्क रहने का माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संयम, सकारात्मक सोच और नियमित पूजा-पाठ से इस अवधि के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है।