नई दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को बड़ी कामयाबी मिली है। एजेंसी ने अदालत में एक नई रिपोर्ट पेश की है। इसमें तीन नए आरोपियों के नामों का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे बहुत लंबे समय से रची जा रही एक गहरी साजिश थी।

एक डॉक्टर ने रची तबाही की साजिश
जांच एजेंसी के मुताबिक इस पूरे हमले का मुख्य साजिशकर्ता एक पढ़ा-लिखा डॉक्टर है। फरार आरोपी डॉक्टर मुजफ्फर अहमद पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ है। वह एक बड़े आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। डॉक्टर मुजफ्फर ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लाल किले के पास गाड़ी में बम रखकर धमाका करने की पूरी योजना तैयार की थी। इस दर्दनाक हादसे में ग्यारह लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में अब तक कुल तेरह लोगों पर शिकंजा कसा जा चुका है।
सीक्रेट ठिकाने पर तैयार हुआ था खतरनाक बारूद
जांच में पता चला है कि आतंकियों का यह जाल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों तक फैला हुआ था। आतंकियों ने फरीदाबाद में एक गुप्त ठिकाना बनाया हुआ था। इसी जगह पर बेहद खतरनाक और घर में तैयार होने वाला बारूद बनाया गया था। आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा घरेलू विस्फोटक होता है जिसे आम रसायनों को मिलाकर बेहद सावधानी से लैब में तैयार किया जाता है और यह पल भर में भारी तबाही मचा सकता है। इसी ठिकाने पर इस बारूद का टेस्ट भी किया गया था।
मददगारों के जरिए पहुंचे थे हथियार और पैसे
एनआईए ने बताया कि इस नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपी आतंकियों के मददगार के रूप में काम कर रहे थे। इनका काम हथियारों, पैसों और बारूद को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाना था। इन्हीं मददगारों ने मुख्य आरोपियों तक आधुनिक राइफलें, पिस्तौल और लाखों रुपये पहुंचाए थे। फरार डॉक्टर की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी ने पैसों के लेन-देन और मोबाइल लोकेशन की जांच के आधार पर इन सभी के खिलाफ मजबूत सबूत इकट्ठा कर लिए हैं।