नई दिल्ली
शादियों के सीजन के बीच सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बाजार में लगातार चौथे दिन सोने की चमक फीकी रही। इस तगड़ी बिकवाली के कारण सोना प्रति 10 ग्राम 2,840 रुपये तक टूट गया है। वहीं चांदी के दामों में भी भारी मंदी दर्ज की गई है, जिससे दिल्ली के सर्राफा बाजारों में अचानक हलचल तेज हो गई है।
चार दिनों में सोना हुआ सस्ता, चांदी दो महीने के निचले स्तर पर पहुंची
दिल्ली के बाजार में गुरुवार को 99.9 फीसदी शुद्धता वाला यानी सबसे खरा सोना 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही यह धड़ाम से गिरकर 1,50,600 रुपये पर आ गया। सोने की तरह चांदी खरीदने वालों के लिए भी यह फायदे का समय है। चांदी की कीमत एक ही दिन में 8,040 रुपये प्रति किलोग्राम तक लुढ़क गई है। इस बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार में चांदी का भाव 2,40,700 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है, जो पिछले दो महीने का सबसे निचला स्तर है।
जानिए क्यों गिरे दाम और क्या होता है डॉलर इंडेक्स
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ कमोडिटी विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) इस समय एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। आसान भाषा में समझें तो डॉलर इंडेक्स दुनिया की छह बड़ी करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला एक पैमाना है। जब भी यह इंडेक्स ऊपर जाता है, तो दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को छोड़कर डॉलर में पैसा लगाने लगते हैं। इसी वजह से कीमती धातुओं के दाम गिर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मंदी, अमेरिका-ईरान विवाद का दिखा असर
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) में भी भारी दबाव देखा जा रहा है। कमोडिटी मार्केट वह जगह होती है जहां सोना, चांदी, तेल और फसलों का वैश्विक स्तर पर व्यापार होता है। वहां हाजिर सोना 1.44 फीसदी गिरकर 4,148.45 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते को लेकर जो अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, उसने भी बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों पर कोई अंतिम फैसला नहीं लेता, तब तक बाजार में ऐसे ही उतार-चढ़ाव देखने को मिलते रहेंगे।