मानसून की पहली बौछार: चरामा तहसील में औसतन 20.1 मिलीमीटर बारिश, लखनपुरी में सबसे ज्यादा बरसे बदरा

चरामा | जनधारा संवाददाता, अनूप कुमार वर्मा:
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अंचल में मानसून ने अपनी पहली उपस्थिति दर्ज करा दी है। कल, 10 जून को क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश हुई, जिससे झुलसती धरती को थोड़ी राहत मिली है। पिछले दो-तीन दिनों से लगातार बादलों की आवाजाही हो रही थी और शाम को ठंडी हवाएं भी चल रही थीं, लेकिन पानी नहीं बरस रहा था। मगर बुधवार को मौसम ने अपना मिजाज बदला और झमाझम बारिश हुई।


​दिनभर उमस के बाद शाम को बदला मौसम
​बुधवार, 10 जून को दिनभर तेज धूप रही और लोग भीषण गर्मी व उमस से बेहाल नजर आए। लेकिन शाम करीब 6:00 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली। आसमान में काले घने बादल छा गए और शाम 7:30 बजे से लगभग एक घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इस बारिश से तापमान में गिरावट आई और हवा में घुली ठंडक ने लोगों को बड़ी राहत दी।


​किसानों के चेहरे खिले, खरीफ सीजन का आगाज
​इस पहली बारिश के साथ ही अंचल के अन्नदाताओं की उम्मीदें जाग उठी हैं। खरीफ फसल की तैयारी के लिए किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों की ओर रुख कर चुके हैं। सूखी धरती को मिली इस नमी के बाद खेतों की जुताई और खेती के शुरुआती काम तेजी से शुरू हो गए हैं।
​चरामा तहसील के वर्षा आंकड़े: लखनपुरी में सर्वाधिक बारिश
​मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 जून को चरामा तहसील के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 80.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिसका औसत 20.1 मिलीमीटर रहा। वर्षा केंद्रों के अनुसार आंकड़े इस प्रकार हैं,
लखनपुरी में 34.09 मिलीमीटर (सबसे ज्यादा),
हलबा में 20.00 मिलीमीटर,
चरामा में 18.00 मिलीमीटर,
पुरी में 8.4 मिलीमीटर,
कुल वर्षा 80.4 मिलीमीटर
औसत वर्षा 20.1 मिलीमीटर वर्षा हुई,
सावधान! अभी राहत कम, तबीयत बिगड़ने का खतरा ज्यादा
​विशेष चेतावनी: हालांकि कल की बारिश ने थोड़ी ठंडक जरूर घोली, लेकिन आज यानी गुरुवार, 11 जून को सुबह से फिर तेज धूप खिल गई है। धूप निकलते ही उमस और गर्मी का ग्राफ एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ गया है।
​चिकित्सकों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल पड़ी रिकॉर्डतोड़ भीषण गर्मी के कारण जमीन पूरी तरह तप रही है। ऐसे में यह पहली हल्की बारिश लोगों को स्थाई ठंडक देने के बजाय उमस बढ़ाकर तबीयत बिगाड़ने का काम कर सकती है। जब तक लगातार और अच्छी झमाझम बारिश नहीं हो जाती, तब तक उमस जनित बीमारियां (जैसे उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और मौसमी बुखार) बढ़ने की आशंका है। इसलिए नागरिकों को इस बदलते मौसम में अपनी सेहत के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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