सरकारी तालाब और श्मशान घाट पर कब्जे की कोशिश! तहसीलदार ने लगाया स्टे, फर्जी पट्टा और संदिग्ध रजिस्ट्री पर उठे सवाल

सूरजपुर/बिहारपुर सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में सार्वजनिक तालाब और श्मशान घाट की भूमि पर कथित कब्जे के प्रयास का मामला सामने आने के बाद राजस्व प्रशासन हरकत में आ गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर तहसीलदार न्यायालय बिहारपुर ने विवादित भूमि पर तत्काल प्रभाव से स्थगन आदेश जारी करते हुए किसी भी प्रकार की जोताई, कब्जा अथवा हस्तक्षेप पर रोक लगा दी है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम बिहारपुर के खसरा नंबर 1307, रकबा 1.65 हेक्टेयर में स्थित सार्वजनिक तालाब एवं श्मशान घाट की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। मामले में रामनगीना, शंकरदयाल, सुगनलाल, रामचरित्तर, गेनालाल सहित अन्य ग्रामीणों ने न्यायालय और पुलिस प्रशासन से शिकायत की है।

तालाब की मेड़ तोड़ने और पेड़ काटने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रामाशंकर वैश्य, कुगेश चंद, तपेश्वर वैश्य, संगेश एवं सूरविन्द वैश्य द्वारा सार्वजनिक तालाब के भीटे (मेड़) को तोड़कर भूमि को समतल किया जा रहा था। साथ ही वहां लगे पेड़-पौधों को काटकर तालाब और श्मशान घाट की भूमि को खेती योग्य बनाने की कोशिश की जा रही थी।

ग्रामीणों का दावा है कि यह भूमि पूरी तरह शासकीय एवं सार्वजनिक उपयोग की है, जिस पर पूर्व में जिला पंचायत द्वारा तालाब निर्माण कार्य भी कराया गया था।

फर्जी पट्टे और संदिग्ध रजिस्ट्री का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विवादित भूमि का कथित रूप से फर्जी पट्टा तैयार कराकर उसे निजी भूमि दर्शाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर भूमि की रजिस्ट्री कराए जाने की भी शिकायत की गई है।

मामले में रजिस्ट्रीकर्ता विनोद गुप्ता ने कथित रूप से बताया कि उन्हें जमीन के एवज में मात्र 50 हजार रुपये प्राप्त हुए। जबकि रजिस्ट्री दस्तावेज में भूमि का मूल्य लगभग 14 से 15 लाख रुपये दर्ज बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि दस्तावेज में लाखों रुपये का लेन-देन दर्शाया गया है तो वास्तविक भुगतान कहां और किस माध्यम से हुआ।

तहसीलदार का सख्त आदेश

तहसीलदार बिहारपुर ने आदेश क्रमांक 1632/वाचक/2025-26 दिनांक 13 मई 2026 के तहत अनावेदकों के जवाब एवं पटवारी प्रतिवेदन प्राप्त होने तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी है।

साथ ही थाना प्रभारी चांदनी (बिहारपुर) को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने और किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश की अवहेलना की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।

पुलिस को सौंपा गया आवेदन

गांव के जिम्मेदार नागरिकों ने चांदनी थाना पहुंचकर आवेदन सौंपा है और मांग की है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उठे सवाल

मामले ने राजस्व और पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भूमि वास्तव में शासकीय और सार्वजनिक उपयोग की थी, तो उसकी रजिस्ट्री किस आधार पर हुई? दस्तावेज में दर्शाई गई राशि और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर क्यों दिखाई दे रहा है? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

पक्ष जानने का प्रयास

मामले में लगाए गए आरोपों के संबंध में रामाशंकर वैश्य से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका और फोन कॉल का जवाब नहीं मिला।

अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

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