स्मार्ट मीटर बना आफत: दो कमरों के घर में आया ₹3,570 का बिजली बिल

विभाग की चौखट से महज 200 मीटर दूर पीड़ित परिवार बेबस
​चारामा जनधारा संवाददाता :अनूप वर्मा

प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब आम जनता के लिए जी का जंजाल और आर्थिक रूप से कमर तोड़ने वाला हथियार बनते जा रहे हैं। जनता को जिस बात का डर था, आखिरकार वही सच साबित हो रहा है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला और बिजली विभाग की संवेदनहीनता को उजागर करने वाला मामला नगर के वार्ड क्रमांक 8 (बाजार पारा) से सामने आया है। यहाँ एक गरीब परिवार के छोटे से घर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली का बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहा है।


​बुजुर्ग मां और बेटा रहते हैं घर में
​पीड़ित उपभोक्ता अंशुमान पटेल (पिता स्वर्गीय शिवकुमार पटेल) ने बताया कि उनका दो कमरों का एक छोटा सा मकान है, जिसमें वे अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहते हैं। घर में बिजली के नाम पर केवल एक पंखा, एक लाइट और एक टीवी है। टीवी भी कभी-कभार ही चलता है क्योंकि अंशुमान अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। गर्मी के दिनों में केवल एक कूलर का उपयोग किया जाता है। स्मार्ट मीटर लगने से पहले उनका बिजली बिल सामान्य दिनों में 200 से 300 रुपये और गर्मी में कूलर चलने पर अधिकतम 400 से 500 रुपये ही आता था।
​स्मार्ट मीटर लगते ही दोगुनी हुई यूनिट और बिलों में आया ‘करंट’
​उपभोक्ता ने एक बड़ा तकनीकी खुलासा करते हुए बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के पहले उनके घर में हर महीने महज 100 से 110 यूनिट तक ही विद्युत खपत होती थी। लेकिन जैसे ही नया स्मार्ट मीटर लगाया गया, बिना कोई नया उपकरण खरीदे या बिना बिजली का उपयोग बढ़ाए, घर की रीडिंग सीधे 200 यूनिट से ऊपर पार होने लगी।
​अगस्त 2025 में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही बिजली बिलों ने आसमान छूना शुरू कर दिया। उनके पिछले कुछ महीनों के बिलों का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है:अगस्त 2025 से पहले (100-110 यूनिट) ₹500 से हमेशा कम बिल आता था, फिर
अगस्त 2025 में ₹1,810,
सितंबर 2025 में ₹2,840,
अक्टूबर 2025 में₹2,170,
नवंबर 2025 में ₹3,570,
दिसंबर 2025 में ₹500,
जनवरी 2026 में ₹510,
फरवरी 2026 में ₹507,
मार्च 2026 में ₹1,740,
अप्रैल 2026 ₹2,660 बिल आया था,इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नवंबर में जहां बिल ₹3,570 आया, वहीं दिसंबर, जनवरी और फरवरी में यह अचानक गिरकर ₹500 के आसपास आ गया। बिना किसी लोड या उपकरण के बदले, यूनिट्स की इस जादुई उछाल और फिर गिरावट ने स्मार्ट मीटरों की सटीकता और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​6 महीने से चक्कर काट रहा पीड़ित, विभाग से महज 200 मीटर की दूरी पर है घर
​इस मामले का सबसे शर्मनाक पहलू बिजली विभाग की घोर लापरवाही और उदासीनता है। पीड़ित उपभोक्ता अंशुमान पटेल (उपभोक्ता क्रमांक: 1000723156) ने 07 मई 2026 को कनिष्ठ यंत्री/अधिशासी अभियंता, चारामा को लिखित आवेदन सौंपकर मीटर बदलने या चेक करने की गुहार लगाई है।
​हैरानी की बात यह है कि बिजली विभाग के दफ्तर से पीड़ित का घर महज 200 मीटर की दूरी पर है, पिछले 6 महीने से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विभाग के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि वह मात्र 200 मीटर दूर जाकर मीटर की जांच कर सके। जबकि इस दौरान विभाग के अधिकारी और कर्मचारी काम के सिलसिले में उस मोहल्ले से कम से कम 50 बार गुजर चुके होंगे, लेकिन किसी ने इस गरीब की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा।
​बड़ा सवाल: 5-7 हजार कमाने वाला परिवार ₹3,500 बिल भरेगा तो खाएगा क्या?
​यह सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि एक गरीब परिवार के जीने के अधिकार पर चोट है। अंशुमान के परिवार की कुल मासिक आय महज 5,000 से 7,000 रुपये है। ऐसे में यदि सरकार और बिजली विभाग उनसे ₹3,500 से ऊपर का बिजली बिल वसूलेंगे, तो यह परिवार खाएगा क्या और जिएगा कैसे? क्या बिजली विभाग इस गरीब परिवार को भूखे मरने पर मजबूर करना चाहता है?
​इतने पुख्ता सबूत और लिखित शिकायत के बाद भी विद्युत विभाग का मौन रहना उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा कलंक है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग जागता है या पीड़ित परिवार को इस ‘अंधाधुंध’ और दमनकारी बिलिंग से राहत पाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

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