Chandigarh ED Action: मोहाली के नामी बिल्डर प्रवीण और नीरज कंसल गिरफ्तार, करोड़ों के चेक बाउंस और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का बड़ा एक्शन

Mohali Real Estate ED Arrest: पंजाब और ट्राईसिटी के रियल एस्टेट कारोबार (real estate business) से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मोहाली और जीरकपुर के बेहद चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों की यह गिरफ्तारी ईडी द्वारा पंजाब, चंडीगढ़ और जीरकपुर में ‘रॉयल एस्टेट ग्रुप’ (Royal Estate Group) और उसकी सहयोगी कंपनी ‘चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई है।

दफ्तर और घरों पर रेड में मिले थे कई अहम दस्तावेज

बता दें कि कुछ दिन पहले ही केंद्रीय जांच एजेंसी (investigation agency) की टीमों ने जीरकपुर में कंपनी के हेड ऑफिस, डायरेक्टर्स के आलीशान घरों और उनके करीबियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड (ED raid) की थी। इस तलाशी अभियान के दौरान ईडी के हाथ कई बेहद अहम डॉक्युमेंट्स, डिजिटल डिवाइस, बैंक खाते के रिकॉर्ड और बेनामी संपत्तियों के कागजात लगे थे। इन दस्तावेजों के जरिए ईडी अब पैसों के हेरफेर और मनी ट्रेल (money trail) की गहराई से जांच कर रही है।

32.67 करोड़ रुपये के चेक बाउंस होने का है गंभीर आरोप

दरअसल, यह पूरा मामला मोहाली के कराला गांव में डेवलप किए जा रहे एक बड़े रिहायशी प्रोजेक्ट (residential project) से जुड़ा हुआ है। पंजाब पुलिस ने 19 जुलाई 2025 को एसएएस नगर (मोहाली) में धोखाधड़ी और साजिश रचने की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज (FIR registered) की थी। आरोप है कि कंपनी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी गमाडा (GMADA) की सरकारी देनदारियों का भुगतान नहीं किया। इसके बदले कंपनी ने जो 32.67 करोड़ रुपये के चेक जारी किए थे, वे बैंक में बाउंस (cheque bounce) हो गए।

निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे, शिकायत के बाद कसता गया शिकंजा

मोहाली-जीरकपुर बेल्ट में पिछले कुछ सालों में रियल एस्टेट मार्केट (real estate market) में जबरदस्त उछाल आया था। रॉयल एस्टेट ग्रुप ने भी निवेशकों को आधुनिक सुविधाएं और तगड़ा रिटर्न देने का वादा करके कई बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे। हालांकि, बाद में ये प्रोजेक्ट्स लटकने लगे। अपनी गाढ़ी कमाई फंसा चुके निवेशकों (investors) ने जब हंगामा और शिकायतें शुरू कीं, तो प्रशासन और जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता चला गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से ट्राईसिटी के बिल्डरों और भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

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