नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में संगीत का हर रंग हमें देखने को मिला है। सुरों का तालमेल कब और कहां बन जाए, यह कोई नहीं जानता। यही वजह है कि हर गाने के पीछे कोई न कोई अनसुना किस्सा छिपा होता है। आज हम आपको सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के एक ऐसे ही सदाबहार गाने की कहानी बताएंगे। यह गीत आपकी प्लेलिस्ट में जरूर होगा, लेकिन इसके पीछे के इतिहास से शायद आप अनजान हों।
अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उनकी एंग्री यंग मैन वाली छवि ने फिल्मों के गानों को भी एक अलग पहचान दी है। कभी रोमांटिक हीरो बनकर वे थिरके, तो कभी एक्शन दृश्यों में भी गानों का जादू चलाया। उनकी सादगी भरे गानों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। उन्हीं में से एक खास गीत 1981 की फिल्म याराना का है, जिसे आज भी लोग बेहद पसंद करते हैं।
छूकर मेरे मन को: एक कालजयी रचना
फिल्म याराना में अमिताभ बच्चन, अमजद खान, नीतू सिंह और कादर खान जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म का गाना छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा आज भी युवाओं और बुजुर्गों की पहली पसंद बना हुआ है। इस गीत को लोग अक्सर शांत मन से सुनते हैं। यह गाना दिलों को गहरा सुकून देने का काम करता है।

क्या रबींद्रनाथ टैगोर से है प्रेरणा?
फिल्म संगीत विशेषज्ञों की मानें तो यह खूबसूरत धुन रबींद्रनाथ टैगोर के एक कालजयी गीत से प्रेरित है। महान संगीतकार राजेश रोशन ने इस धुन को बेहद सादगी के साथ तैयार किया था। बंगाली लोक संगीत की महक इस गाने में साफ महसूस की जा सकती है। यही कारण है कि यह गीत कानों में उतरते ही मन को शांति से भर देता है।
इस गाने की सफलता का असर
फिल्म की कहानी सच्ची दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती है। इस गाने ने फिल्म के इमोशनल ग्राफ को एक नई ऊंचाई दी थी। अमिताभ बच्चन की सादगी और किशोर कुमार की जादुई आवाज ने इसे अमर बना दिया। आज भी जब यह गाना रेडियो या सोशल मीडिया पर बजता है, तो लोग पुरानी यादों में खो जाते हैं। यह गीत संगीत प्रेमियों के लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है।