नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे प्रदर्शनों पर पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि यह हिंसा दशकों से जारी अवैध कब्जे और शोषण का नतीजा है। पीओजेके में स्थानीय लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
अधिकारों का हनन और प्रशासनिक दमन
प्रवक्ता ने बताया कि वहां की जनता अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर सड़कों पर है। प्रशासन उनकी समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन पर बल प्रयोग कर रहा है। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां महिलाओं और बच्चों के साथ भी क्रूरता कर रही हैं। क्षेत्र में भोजन और दवाओं की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है। इसके अलावा वहां इंटरनेट की सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। इन हिंसक गतिविधियों में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है।

पीओजेके में बिगड़ते हालात
गुलाम जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शन और अधिक हिंसक हो गए। रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भीड़ पर सीधे फायरिंग कर दी। इस घटना में 6 लोगों की मौत हो गई है। इससे पहले की घटनाओं को जोड़ें तो अब तक 50 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बढ़ते तनाव के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
भारत की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील
भारत ने स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले इलाकों में लोगों की आवाज दबाने के लिए हिंसक हथकंडे अपना रहा है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह मानवाधिकारों के इन घोर उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाए। पाकिस्तान को इन मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। भारत का यह रुख क्षेत्र में बढ़ रही मानवीय त्रासदी को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।