Bengaluru Metro Construction Delay: बंगाल चुनाव के चक्कर में थमा बेंगलुरु मेट्रो का काम, 10 हजार मजदूर लापता

बेंगलुरु। बेंगलुरु के लोगों को जाम से निजात दिलाने वाली ‘नम्मा मेट्रो’ (Namma Metro) को एक बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) का सीधा असर अब कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में दिखने लगा है। चुनाव में वोट डालने अपने घर गए 10,000 से ज्यादा प्रवासी मजदूर (migrant workers) अब तक वापस नहीं लौटे हैं। इस वजह से बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) का काम पूरी तरह अटक गया है।

पिंक और ब्लू लाइन का काम ठप

BMRCL की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं—ब्लू लाइन (Bengaluru Metro Blue Line) और पिंक लाइन (Pink Line) पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। इस प्रोजेक्ट में भारी संख्या में पश्चिम बंगाल के कुशल श्रमिक काम कर रहे थे। दो चरणों में हुए मतदान के लिए ये मजदूर बंगाल गए थे, लेकिन वोटिंग खत्म होने के कई दिनों बाद भी वे काम पर नहीं लौटे हैं। लेबर की भारी किल्लत (labor shortage in metro project) के कारण कई जगहों पर काम या तो बहुत धीमा हो गया है या पूरी तरह ठप पड़ा है।

बदल जाएगी डेडलाइन?

मजदूरों के न होने से मेट्रो प्रोजेक्ट की टाइमलाइन (Metro Project Timeline) बिगड़ गई है।

  • पिंक लाइन: इसके 6 एलिवेटेड स्टेशनों को इसी साल जून तक शुरू करने की तैयारी थी।
  • ब्लू लाइन: 9.75 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को दिसंबर तक आम जनता के लिए खोलने का लक्ष्य था।

स्टेशन निर्माण, ट्रैक बिछाने और सिग्नलिंग जैसे तकनीकी काम रुकने से अब इन दोनों लाइनों के उद्घाटन में देरी होना तय माना जा रहा है।

आम जनता परेशान, विकल्प की तलाश

बेंगलुरु अपने भारी ट्रैफिक (Bengaluru Traffic Problem) के लिए जाना जाता है। ऐसे में मेट्रो विस्तार में देरी से स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए। दूसरी तरफ, BMRCL के अधिकारी अब अन्य राज्यों से वैकल्पिक श्रमिकों (alternative workforce) को बुलाने की योजना बना रहे हैं ताकि काम को दोबारा रफ्तार दी जा सके।

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