मुंबई।
90 के दशक में जब मनोरंजन का एकमात्र जरिया दूरदर्शन था, उस दौर में जासूसी शो ब्योमकेश बक्शी ने दर्शकों के बीच एक अलग ही सनसनी पैदा कर दी थी। साल 1993 से 1996 तक प्रसारित हुए इस शो को भारतीय टेलीविजन का शेरलॉक होम्स कहा जाता है। शरदेन्दु बंद्योपाध्याय की कहानियों पर आधारित इस सीरियल की लोकप्रियता आज के दौर की चर्चित वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस और पाताल लोक से भी कहीं अधिक मानी जाती है।
दिग्गज फिल्ममेकर बासु चटर्जी के निर्देशन में बने इस शो में रजित कपूर ने जासूस ब्योमकेश बक्शी का मुख्य किरदार निभाया था। शो की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इसमें जासूस किसी हाई-टेक गैजेट या लैब के बजाय केवल अपनी तेज बुद्धि और बारीकी से किए गए निरीक्षण के बल पर कठिन से कठिन केस सुलझाता था। रजित कपूर के दोस्त अजीत कुमार के रूप में केके रैना ने भी अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी थी।
सस्पेंस और मिस्ट्री से भरपूर इस शो के हर एपिसोड में दर्शकों को दिमागी खेल और तर्कशक्ति का बेहतरीन संगम देखने को मिलता था। आज भी इस जासूसी थ्रिलर को इसकी सादगी, बेहतरीन कंटेंट और अभिनय के लिए याद किया जाता है। इसने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि टीवी पर थ्रिलर कंटेंट के लिए नए मानक भी स्थापित किए।