चीन ने ताइवान के खिलाफ एक बेहद खतरनाक और रणनीतिक साइलेंट गेम शुरू कर दिया है। इस चाल के चलते ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाइ चिंग ते अपने ही देश में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। ताइवान सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि चीन के भारी कूटनीतिक दबाव के कारण राष्ट्रपति लाइ की एस्वातिनी यात्रा को रद्द करना पड़ा है क्योंकि रास्ते में पड़ने वाले देशों ने उनके विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
तीन देशों ने बंद किए दरवाजे और मेडागास्कर का दो टूक जवाब
राष्ट्रपति लाइ के विमान को एस्वातिनी पहुंचने के लिए सेशेल्स, मेडागास्कर और मॉरीशस के एयरस्पेस का इस्तेमाल करना था लेकिन इन तीनों देशों ने अनुमति देने से मना कर दिया। इस मामले में मेडागास्कर के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वे केवल चीन की संप्रभुता को मान्यता देते हैं और इसीलिए ताइवान के राष्ट्रपति की उड़ान पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह बीते डेढ़ साल में पहली बार है जब चीन की घेराबंदी के कारण ताइवान के राष्ट्रप्रमुख को अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी है।
ताइवान पर मंडराया युद्ध का साया और चीन की आक्रामक घेराबंदी
ताइवान के राष्ट्रपति ने चीन की इस हरकत पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बीजिंग की इस दमनकारी नीति को पूरी दुनिया देख रही है और इससे उसे कुछ हासिल नहीं होगा। दूसरी तरफ अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों की चेतावनी ने तनाव और बढ़ा दिया है जिसमें दावा किया गया है कि चीन 2027 के अंत तक ताइवान पर सैन्य हमला कर सकता है। चीन लगातार ताइवान के आसपास युद्ध अभ्यास कर रहा है और हवाई रास्तों को बंद कर यह संदेश दे रहा है कि वह ताइवान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग करने के मिशन पर है।
