नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच सीजफायर यानी संघर्ष विराम की घोषणा कर दी गई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका के इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा है कि यदि उस पर हमले बंद कर दिए जाते हैं, तो वह अपने तमाम रक्षात्मक सैन्य अभियान तुरंत रोक देगा। इस समझौते के साथ ही ईरान ने अगले दो सप्ताह के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन की अनुमति देने की महत्वपूर्ण घोषणा की है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बुधवार को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया कि यह आवागमन ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी सीमाओं के अधीन होगा। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अमेरिका ने अपने 15 सूत्री प्रस्ताव के आधार पर वार्ता का अनुरोध किया था। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव के सामान्य ढांचे को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार करने के बाद यह सहमति बनी है।
इस ऐतिहासिक समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता महत्वपूर्ण रही है। ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा क्षेत्र में शांति बहाली के लिए किए गए अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ही यह वार्ता संभव हो सकी है। प्रधानमंत्री शरीफ के अनुरोध और अमेरिका के सकारात्मक रुख को देखते हुए ईरान ने अपनी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं को रक्षात्मक अभियान बंद करने का निर्देश देने की घोषणा की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीजफायर से वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से व्यापारिक गतिविधियों में आ रही बाधाएं दूर होंगी। फिलहाल दोनों पक्ष वार्ता के अगले चरणों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। आगामी दो सप्ताह का समय इस समझौते के क्रियान्वयन और तकनीकी समन्वय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
