छत्तीसगढ़ की 101 महान विभूतियों पर जनधारा का शोधपरक प्रकाशन को मुख्यमंत्री साय ने सराहा


रायपुर। हमारा विरसा: हमारी विरासत श्रृंखला के अंतर्गत आज की जनधारा की ओर से चार खंडो में अलग-अलग क्षेत्रों की 101 विभूतियों पर शोधपरक पठनीय सामग्री का चित्रमय प्रकाशन किया गया है। प्रथम खंड में छत्तीसगढ़ के अमर बलिदानी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कथा है। वहीं द्वितीय खंड में छत्तीसगढ़ की संत परपंरा और समाज सुधार से जुड़े व्यक्तियों का चित्रमय प्रकाशन किया गया है। आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने 17 मार्च को छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भेंट करके उन्हें ये पुस्तकें तथा जनधारा की ओर से हाल ही में प्रकाशित पुस्तकें भारतीय राष्ट्रवाद का मानवीय चेहरा अटल बिहारी वाजपेयी, छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल, स्त्रीधारा पात्रिका का अंक भेंट की।


हमारा विरसा: हमारी विरासत श्रृंखला के अंतर्गत खंड-1: छत्तीसगढ़ के 19 अमर बलिदानी एवं स्वतंत्रता सेनानियों, ज्ञात-अज्ञात नायकों तथा छत्तीसगढ़ की जनविद्रोह की परंपरा को प्रकाशित किया गया है। खंड-2: छत्तीसगढ़ के संत परंपरा एवं समाज सुधार से जुड़े 22 व्यक्तित्वों पर सामग्री प्रकाशित की गई है। खंड-3: छत्तीसगढ़ के कला एवं साहित्य लोक परंपरा से जुड़े 31 व्यक्तित्वों पर केंद्रित है। खंड-4: छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता एवं राजनीति से जुड़े 31 व्यक्तित्वों पर केंद्रित पुस्तकें भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने जनधारा के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री बताया। उन्होंने इस प्रकाशन का डिजीटल फार्मेट भी तैयार करके लोगों तक पहुंचाने कहा।
इस अवसर पर जनधार के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने बताया कि पिछले पांच सालों से प्रकाशित हमारी साहित्य वार्षिकी को देशभर के पाठकों का काफी स्नेह और सराहना मिली है। अब हम इसका त्रैमासिक प्रकाशन करने जा रहे है। इस साहित्य वार्षिकी का संपादन देश के प्रसिद्ध कथाकार लेखक भालचन्द्र जोशी करते हैं। प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने बताया कि 35 वर्षों से नियमित प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र आज की जनधार अब रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर के साथ ही भोपाल से भी प्रकाशित हो रहा है। उन्होंने जनधारा की ओर से मई दिवास के अवसर पर भिलाई में आयोजित किये जाने वाले श्रमवीर सम्मान के लिए भी मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया। इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग के आयुक्त रवि मित्तल भी उपस्थित थे।
आज की जनधारा की ओर से प्रकाशित हमारा विरसा, हमारी विरासत को तैयार करने में इतिहासकार डॉ. रामेन्द्र नाथ मिश्रा, डॉ. लक्ष्मीकांत निगम, के के अग्रवाल, डॉ. सुधीर शर्मा जगदलपुर के साहित्यकार हिमांशु शेखर, विजय सिंह, भिलाई-दुर्ग से वरिष्ठ साहित्यकार महावीर अग्रवाल, परदेशी राम वर्मा, डॉ. सियाराम शर्मा, बी. आर. साहू का विशेष सहयोग रहा है। इसके अलावा डॉ. प्रदीप शर्मा, रेखराज चौरागढ़े, आनंद हर्षुल, जयप्रकाश।

हमारा विरसा: हमारी विरासत श्रृंखला के अंतर्गत पहले दो खंडों में पहले भाग के खण्ड – एक में – अमर बलिदानी गुंडाधुर : बस्तर का अमर जननायक। अमर बलिदानी गोपाल राय मल्ल : बस्तर की धरती का स्वाभिमानी अमर नायक। अमर बलिदानी गेंद सिंह : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अमर सेनानी। अमर बलिदानी सुरेन्द्र साय: जनस्वाधीनता, आदिवासी चेतना और औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध दीर्घ प्रतिरोध का प्रतीक पुरुष। अमर बलिदानी वीरनारायण सिंह : सोनाखान की धरती और लोकनायक का त्याग। वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी : स्वाधीनता और स्वाभिमान की प्रारम्भिक चेतना। अमर बलिदानी हनुमान सिंह : बस्तर अंचल के आरंभिक स्वतंत्रता चेतना के अग्रदूत। स्वतंत्रता सेनानी सेठ शिवदास डागा : छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन के दानवीर जननायक। स्वतंत्रता सेनानी पंडित संदरलाल शर्मा : छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत। छत्तीसगढ़ के ज्ञात-अज्ञात नायक-छत्तीसगढ़ में जन विद्रोह की परंपरा को शामिल किया गया है।
खण्ड – दो में – स्वतंत्रता सेनानी वामनराव लाखे : छत्तीसगढ़ की क्रांति-चेतना के पुरोधा। स्वतंत्रता सेनानी वैरिस्टर छेदीलाल : छत्तीसगढ़ की न्याय परंपरा और राष्ट्रीय जागरण के शिल्पी। स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर प्यारेलाल सिंह : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर पुरुष। स्वतंत्रता सेनानी पंडित रविशंकर शुक्ल : छत्तीसगढ़ के जननायक। स्वतंत्रता सेनानी घनश्याम सिंह गुप्त : मातृभाषा, संविधान और जन सेवा का उज्जवल अध्याय। स्वतंत्रता सेनानी इंजीनियर राघवेंद्र राव : सामाजिक परिवर्तन के नायक। स्वतंत्रता सेनानी बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव : धमतरी की धरती पर राष्ट्रीय चेतना का उदय। स्वतंत्रता सेनानी मोलाना अब्दुल रऊफ खान : वाणी और आत्मबल का विशिष्ट व्यक्तित्व। स्वतंत्रता सेनानी डॉ. खूबचंद बघेल : छत्तीसगढ़ गौरव और अस्मिता के अमर पुरोधा। स्वतंत्रता सेनानी परसराम सोनी : गुमनाम क्रांतिकारी की अदम्य गाथा को शामिल किया गया है।


भूमिका : छत्तीसगढ़ की संत परंपरा और सामाजिक नवजागरण 3
हमारी विरसा हमारी विरासत भाग दो के खण्ड-1 : सन्त परम्परा के अंतर्गत : महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, संत गहिरा गुरु, स्वामी आत्मानंद, संत यति यतनलाल, बिलासा बाई केवटिन, मिनी माता, महंत राजा घासीदास, कबीर दास और कबीरपंथ, संत रविदास।
खण्ड-2 में समाज सुधारकों में – दानवीर भामाशाह, दाऊ कल्याण सिंह, राजा चक्रधर लिह, बिन्नी बाई सोनकर, माता राजमोहिनी देती, महाराजा अग्रसेन, बिसाहूदास महत, राजमहंत नैनदास महिलांगे, संत-कवि पवन दीवान, धनीराम दास, दूधाधारी महाराज को शामिल किया गया है।
आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्र ने कहा है कि जनधारा के इस प्रयास को अंतिम और पूर्व इतिहास ग्रंथ के रूप में न देखकर छत्तीसगढ़ के अमर नायको, विभूतियों के योगदान की संवेदनात्मक प्रस्तुति के रूप में देखने की अपील की गई है। हमारा यह प्रयास स्मृति और इतिहास के बीच सेतु का कार्य करेगा और हम इसे भविष्य में प्राप्त सुझाव और जानकारी के आधार पर और अद्यतन और बेहतर बनायेंगे।

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