रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगर सैनिकों (होमगार्ड) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नगर सैनिकों को पुलिसकर्मियों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। न्यायालय ने सरकार को तीन महीने के भीतर इस आदेश का पालन करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है।
मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब बिलासपुर जिले में कार्यरत नगर सैनिकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर समान काम के बदले समान वेतन की मांग की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को पुलिसकर्मियों के समान वेतनमान देने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट के इस फैसले का पालन न होने पर डोमनलाल चंद्राकर और सुरेंद्र कुमार देशमुख ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर हाई कोर्ट ने पुनः सरकार को तय समय सीमा में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के उस फैसले पर मुहर लगा दी है, जिसके तहत नगर सैनिकों को पुलिसकर्मियों के बराबर सुविधाएं और वेतन देने की बात कही गई थी। इस फैसले से प्रदेश भर के हजारों नगर सैनिकों को लाभ मिलेगा।