सरकारी योजनाओं के सहारे बदली जिंदगी, पीएम आवास ने दी सुकून की छांव
कोरिया, 11 मार्च 2026/ ग्राम पंचायत रटगा निवासी जनिया बाई की कहानी महिला सशक्तीकरण, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है। सीमित संसाधनों और अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने साहस व मेहनत के बल पर अपने परिवार को संभालते हुए नई राह बनाई।
जनिया बाई के पति नधीर सिंह परिवार के मुख्य सहारा थे, लेकिननधीर सिंह के असमय निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक और मानसिक रूप से यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण था। दो बच्चों की जिम्मेदारी के साथ जीवनयापन करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
इसी बीच उनके बड़े बेटे के मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाने से परिवार की परेशानियां और बढ़ गईं। इसके बावजूद जनिया बाई ने मजदूरी और खेती- किसानी का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण जारी रखा। गांव में जब भी मजदूरी का काम मिलता, वे उसे पूरी मेहनत और लगन से करती थीं।
जनिया बाई लंबे समय तक एक कच्चे और कमजोर मकान में रहती थीं। बरसात के दिनों में छत और दीवारों से पानी टपकने के कारण घर में रहना मुश्किल हो जाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पक्का मकान बनवाना उनके लिए संभव नहीं था।
ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके जीवन में उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के तहत उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ। जनिया बाई ने केवल योजना की सहायता पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं भी घर निर्माण में मेहनत की मनरेगा के अंतर्गत मिलने वाली मजदूरी में काम कर उन्होंने उस राशि को भी अपने घर के निर्माण में लगाया।
उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह हुआ कि उनका पक्का मकान समय पर बनकर तैयार हो गया। अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक इस पक्के आवास में सुकून की छांव में रहने लगी।
जनिया बाई को शासन की अन्य योजनाओं जैसे विधवा पेंशन योजना और उज्ज्वला गैस योजना का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में आर्थिक सहारा मिला है।