Worred About Forestry: खत्म हो रहे प्राकृतिक जंगल, वन संरचना में आ रहा बदलाव…चिंता में वानिकी वैज्ञानिक


इसलिए पुराने वन अहम

प्रदेश के पुराने साल वन नमी संरक्षण और वर्षा चक्र बनाए रखते हैं। साल का एक परिपक्व पेड़ अपने जीवऩ काल में 200 से 300 टन कार्बन संचित कर सकता है। सामाजिक महत्व पुराने वनों का इसलिए भी जाना जा सकता है क्योंकि तेंदू, महुआ, चिरौंजी और इमली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है। इसके अलावा पुराने वन, आदिवासी समाज को धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से जोड़े रखते हैं।


विविधता से परे नए युवा वन

नए वन में बांस और साल के युवा पौधे ज्यादा नजर आ रहे हैं। यह प्रजातियां कार्बन डाइऑक्साइड को तेजी से अवशोषित करती हैं। कार्बन संग्रहण की कमजोर क्षमता दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित कर रही है। जैव विविधता इसलिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही क्योंकि युवा वनों में भालू, बाघ और जंगली भैंस के साथ औषधिय पौधे सुरक्षित नहीं होते।


चिंता इसलिए

पुराने वनों का क्षरण और नए वनों की वृद्धि वानिकी वैज्ञानिकों को इसलिए चिंता में डाल रही है क्योंकि यह स्थितियां कार्बन भंडार को प्रभावित कर रहीं हैं। इसलिए पुराने वनों का संरक्षण ‘कार्बन हॉटस्पॉट’ मानकर संरक्षित करना होगा। खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक कार्बन भंडारण करने वाली मिश्रित प्रजातियों के पौधों का रोपण करना होगा। बांस के जंगल पर सख्त नजर रखनी होगी क्योंकि अब यह प्रजातियां ग्रामीणों की आजीविका और कार्बन क्रेडिट को बढ़ाती है।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *