Wipro Pune Female Employee Row: आईटी हब पुणे से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। विप्रो टेक्नोलॉजीज (Wipro Technologies Pune) की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कंपनी और अपनी सहकर्मी पर धार्मिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर भेदभाव और जबरन इस्तीफा लिखवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिला का दावा है कि कंपनी के हिंजवडी स्थित दफ्तर (Hinjawadi IT Park Pune) में काम करने के दौरान उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद आईटी सेक्टर और पुणे में हड़कंप मच गया है।
हिंदू जनजागृति समिति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो पड़ी पीड़िता, 50 लाख का मुआवजा मांगा
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब पुणे में हिंदू जनजागृति समिति (Hindu Janajagruti Samiti) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान पूर्व कर्मचारी ने मीडिया के सामने रोते हुए अपने साथ हुई आपबीती सुनाई। महिला ने बताया कि उसने प्रताड़ना के खिलाफ हिंजवडी पुलिस स्टेशन (Hinjawadi police station Pune) में लिखित शिकायत दर्ज करा दी है। महिला के वकील के मुताबिक, विप्रो कंपनी को इस लापरवाही के लिए एक कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग (demanded 50 lakh compensation) की गई है।
‘मुस्लिम से संबंध बनाओ, विदेश जाने का मिलेगा मौका’— सहकर्मी पर सनसनीखेज आरोप
पीड़ित महिला ने अपनी सहकर्मी पर सीधे तौर पर निशाना साधा है। महिला का आरोप है कि ऑफिस की ही एक अन्य महिला सहकर्मी उस पर बार-बार हिंदू धर्म छोड़ने और इस्लाम अपनाने (forced to accept islam) का दबाव बनाती थी।
इतना ही नहीं, आरोपी सहकर्मी उसे किसी मुस्लिम पुरुष के साथ संबंध बनाने के लिए भी उकसाती थी। वह अक्सर महिला की निजी जिंदगी में दखल देती थी और कहती थी कि अगर वह इस्लाम कबूल कर लेगी, तो उसकी जिंदगी संवर जाएगी और कंपनी उसे विदेश जाने के अवसर (onsite opportunities in IT) भी देगी।
10 महीने तक झेला टॉर्चर; शिकायत की तो खुद पीड़िता को ही नौकरी से निकाला
महिला का दावा है कि उसने करीब 10 महीने तक इस मानसिक उत्पीड़न (workplace harassment and discrimination) को बर्दाश्त किया। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उसने मामले की पूरी जानकारी विप्रो के वरिष्ठ अधिकारियों और एचआर को दी। लेकिन कंपनी ने आरोपी सहकर्मी पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा पीड़ित महिला को ही निशाने पर ले लिया।
कंपनी की ओम्बड्स कमेटी (Wipro Ombuds Committee) में खुद पीड़िता के खिलाफ ही शिकायत दर्ज करा दी गई। इसके बाद अगस्त 2025 में एक टीम मीटिंग के बहाने महिला को बुलाया गया और बिना उसका पक्ष सुने, डरा-धमकाकर जबरन उसका इस्तीफा (forced resignation case) ले लिया गया।