नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में खाद की उपलब्धता को लेकर एक बहुत बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने यूरिया के लिए नई निवेश नीति को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का मुख्य लक्ष्य भारत को यूरिया के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।
सरकार की योजना के अनुसार अब देश में गैस पर आधारित 8 से 9 नए यूरिया प्लांट लगाए जाएंगे। इससे हर साल करीब एक करोड़ टन यूरिया का अतिरिक्त उत्पादन होगा। इस कदम से सरकारी, निजी और सहकारी क्षेत्र की कंपनियों को नई यूनिट्स लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जैसे-जैसे फसलों का चक्र बदल रहा है, वैसे-वैसे यूरिया की मांग भी हर साल लगभग 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।
अभी देश में यूरिया की सालाना मांग करीब 4 करोड़ टन है। इसके मुकाबले भारत में कुल उत्पादन लगभग 3 करोड़ टन ही हो पाता है। इस वजह से हमें हर साल करीब 1 करोड़ टन यूरिया विदेशों से मंगवाना पड़ता है। सरकार की यह नई नीति इसी बड़े अंतर को खत्म करने का काम करेगी।
पुरानी नीति से मिली थी सफलता
यह नई निवेश नीति वर्ष 2012 में आई पुरानी नीति का ही बढ़ा हुआ रूप है। उस पुरानी नीति के तहत देश में 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए थे, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों शामिल थे। उस नीति की अवधि अक्टूबर 2019 में खत्म हो गई थी। इसके बाद से ही उर्वरक विभाग को नए प्लांट लगाने के लिए कई प्रस्ताव मिल रहे थे।
वर्तमान में देश में कुल 33 यूरिया बनाने वाली इकाइयां काम कर रही हैं। इन सभी की कुल क्षमता लगभग 269.42 लाख टन है। पिछले दस सालों में 6 नए संयंत्रों के जुड़ने से देश में उत्पादन तो बढ़ा है और बाहर से आने वाली खाद पर निर्भरता कुछ कम हुई है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण हमें अभी भी बड़ी मात्रा में यूरिया आयात करना पड़ रहा है। इस नई नीति के आने से आने वाले समय में देश की खाद समस्या का समाधान होने की पूरी उम्मीद है।
