रायपुर। करीब ढाई महीने तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आखिरकार बड़ा यू-टर्न ले लिया है। लगातार आंदोलन, विरोध और आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने की घोषणा के बाद अब निजी स्कूलों ने गरीब और वंचित बच्चों को एडमिशन देने का फैसला कर लिया है।
एसोसिएशन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि “वंचित वर्ग के एक भी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो”, इसलिए 18 मई से प्रदेश के सभी निजी स्कूल आरटीई के तहत प्रवेश देंगे।
आंदोलन से बैकफुट पर आया संगठन
1 मार्च से शुरू हुए असहयोग आंदोलन में निजी स्कूल संचालकों ने सरकार पर प्रतिपूर्ति राशि नहीं देने और नियमों में बदलाव का आरोप लगाया था। 4 अप्रैल को संगठन ने आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया था, जिसके बाद प्रदेशभर में विवाद गहरा गया था।
लेकिन अब हाईकोर्ट में मामला पहुंचने, अवमानना याचिका और लगातार बढ़ते दबाव के बीच संगठन को अपना रुख बदलना पड़ा।
हाईकोर्ट नोटिस के बाद बदले सुर
संगठन ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश के पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका भी लगाई गई, जिसमें स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी को नोटिस जारी हुआ है।
इसी बीच संगठन ने यह भी स्वीकार किया कि इस साल आरटीई प्रवेश में भारी गिरावट आई है और कई जिलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली हैं।
65 हजार बच्चों के भविष्य का हवाला
एसोसिएशन ने दावा किया कि हर साल लगभग 65 हजार विद्यार्थियों का प्रवेश होता था, लेकिन इस साल केवल 22 हजार सीटें ही भर पाई हैं। संगठन का कहना है कि एंट्री क्लास बदलने के फैसले से गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक दबाव बना कारण?
राजधानी से लेकर जिलों तक लगातार उठ रहे सवाल, अभिभावकों का विरोध और कोर्ट की सख्ती के बाद अब संगठन का यह फैसला चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार की बड़ी जीत और निजी स्कूल संगठन की “बैकफुट वापसी” माना जा रहा है।