इलाज या आफत? सरकारी अस्पताल ने थमाई फफूंद लगी गोलियां, इधर निजी अस्पताल में युवक की संदेहास्पद मौत

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MP Big News : भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं की दो डरावनी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां जिला अस्पताल (जेपी अस्पताल) में मरीज को फफूंद लगी दवाई थमा दी गई, वहीं दूसरी ओर एक निजी अस्पताल में गलत इंजेक्शन के चलते एक 29 वर्षीय युवक की जान जाने का सनसनीखेज आरोप लगा है।

MP Big News : केस 1: जेपी अस्पताल में ‘जहर’ बांट रही सरकारी फार्मेसी
भोपाल के मुख्य जिला चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) में शुक्रवार को एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई। हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे एक मरीज को अस्पताल की फार्मेसी से ऐसी दवा दी गई, जिसमें फफूंद (Fungus) लगी हुई थी।

क्या है पूरा मामला: मरीज पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जांच कराने पहुंचा था। वहां मौजूद इंटर्न डॉक्टर ने उसे ‘डिक्लोफिनेक 50 MG’ (दर्द निवारक) दवाई लिखी। जब मरीज ने फार्मेसी से दवा ली, तो गोलियों पर फफूंद जमी देख वह दंग रह गया।

हैरानी की बात: दवा की एक्सपायरी डेट जून 2027 है, यानी वह तकनीकी रूप से वैध थी, फिर भी उसकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वह जानलेवा साबित हो सकती थी। मरीज ने इस मामले की शिकायत CMHO डॉ. मनीष शर्मा को ईमेल के जरिए भेजी है।

केस 2: अक्षय हॉस्पिटल में हंगामा, गलत इंजेक्शन से मौत का आरोप
दूसरी घटना चार इमली स्थित अक्षय हॉस्पिटल की है, जहां इलाज के दौरान एक 29 वर्षीय युवक की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने युवक को गलत इंजेक्शन लगाया, जिससे उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ी और उसकी जान चली गई।

परिजनों का आक्रोश: युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति को संभालने के लिए हबीबगंज थाना पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।

पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ पाएगी।

इन दोनों घटनाओं ने भोपाल के चिकित्सा तंत्र की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकारी दावों की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है, तो दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।

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