अनूप वर्मा, चरामा। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के बस्तर दौरे को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। भाजपा जहां इस दौरे को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी पहल और विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बस्तर के अस्तित्व, आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
भानुप्रतापपुर की विधायक Savitri Mandavi ने बस्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि बस्तर के वनांचल और आदिवासी अस्मिता की लड़ाई है।
विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में विकास के नाम पर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर आदिवासी इलाकों पर पड़ रहा है। उन्होंने नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण, बैलाडीला की खदानों को निजी कंपनियों को सौंपने और नंदराज पहाड़ की विवादित लीज को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
ज्ञापन में बस्तर की जेलों में बंद हजारों आदिवासियों की रिहाई और ग्रामीणों पर दर्ज कथित फर्जी मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई गई। साथ ही बस्तर संभाग में बंद किए गए करीब 2000 सरकारी स्कूलों को दोबारा शुरू करने की मांग की गई।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एनएमडीसी मुख्यालय को हैदराबाद से जगदलपुर शिफ्ट करने, बस्तर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का विशेष पैकेज देने और नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायतों को 1-1 करोड़ रुपए की सहायता राशि जारी करने की भी मांग रखी।
इसके अलावा खराब सड़कों, टूटी पुल-पुलियों, धान की बर्बादी और बढ़ती महंगाई को लेकर भी सरकार को घेरा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बस्तर की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार बस्तर से जुड़े इन गंभीर सवालों पर क्या जवाब देती है और क्या आदिवासी इलाकों की चिंताओं का समाधान निकल पाएगा।