( अम्बिकापुर ) मुख्यमंत्री की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सपनों को नई उड़ान दी है।
सरगुजा जिले के अंबिकापुर की रहने वाली बबिता शर्मा और उनके परिवार की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे सरकारी योजनाएं एक आम आदमी के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं।
रेंट के मकान से स्कूल के मैदान तक का सफर .
अंबिकापुर के वार्ड क्रमांक 24, ढोलापारा (महामाया मंदिर के पीछे) में रहने वाली बबिता शर्मा एक गृहणी हैं, जबकि उनके पति नंद लाल शर्मा बढ़ई (कारपेंटर) का कार्य कर अपनी आजीविका चलाते हैं। बबिता बताती हैं कि जब वे किराए के मकान में रह रहे थे, तब उन्हें आरटीई के माध्यम से निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश की जानकारी मिली।
अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपनी छोटी बेटी सुगंधा शर्मा का फॉर्म भरा।
बचपन का अधूरा सपना, बेटी करेगी पूरा
बबिता शर्मा अपनी आपबीती साझा करते हुए भावुक स्वर में कहती हैं, आर्थिक तंगी के कारण मेरे माता-पिता ने बहुत कम उम्र में मेरी शादी कर दी थी, जिससे मेरी पढ़ाई आठवीं के बाद छूट गई।
मेरे पति भी अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं।
मैं हमेशा से चाहती थी कि जो मौका मुझे नहीं मिला, वह मेरे बच्चों को मिले।
इंग्लिश मीडियम स्कूल में निःशुल्क शिक्षा
लॉटरी सिस्टम में सुगंधा का नाम आने के बाद उसका चयन शहर के प्रतिष्ठित विक्टोरिया पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में हुआ।
आज सुगंधा वहां अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा ग्रहण कर रही है।
बबिता का कहना है कि एक मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के लिए इतने बड़े स्कूल की फीस वहन कर पाना असंभव था, लेकिन आरटीई योजना ने इस बाधा को दूर कर दिया है।
योजना के प्रति जताया आभार
बबिता और उनका परिवार अब सुगंधा को उसी विद्यालय में 12वीं तक पढ़ाने का संकल्प ले चुका है।
बबिता ने राज्य सरकार और इस कल्याणकारी योजना को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने का वास्तविक साहस दे रही है। हम बहुत खुश हैं कि हमारी बेटी अच्छी पढ़ाई कर रही है। सरकार की इस योजना ने हम जैसे परिवारों की चिंता दूर कर दी है।“