नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां Apple और Google अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। ‘टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट’ (TTP) की ताजा रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे ऐप्स धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो AI की मदद से किसी भी साधारण तस्वीर को बिना सहमति के अश्लील (Deepfake) फोटो में बदल देते हैं।
नीतियों की खामियों का उठा रहे फायदा
रिपोर्ट के मुताबिक, Apple के ऐप स्टोर और Google के प्ले स्टोर पर दर्जनों ऐसे सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं, जो मशहूर हस्तियों और आम लोगों की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें आपत्तिजनक अवस्था में दिखा सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये कंपनियां न केवल इन ऐप्स को जगह दे रही हैं, बल्कि अपने सर्च रिजल्ट और ‘ऑटो-कम्प्लीट’ फीचर के जरिए यूजर्स को इन तक पहुंचने का रास्ता भी दिखा रही हैं।
करोड़ों का मुनाफा और लाखों डाउनलोड्स
मार्केट रिसर्चर ‘AppMagic’ के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि इस तरह की विवादित ऐप्स को अब तक करीब 48.3 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। इन ऐप्स ने कंपनियों के लिए लगभग 122 मिलियन डॉलर (करीब 1022 करोड़ रुपये) का रेवेन्यू भी जेनरेट किया है। मुनाफे का यह खेल इन कंपनियों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई के बाद फिर हो रही वापसी
यह पहली बार नहीं है जब इन ऐप्स पर सवाल उठे हों। साल की शुरुआत में भी कुछ ऐप्स को हटाया गया था, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ ही महीनों के भीतर दर्जनों नए ऐप्स फिर से स्टोर पर लौट आए। टीटीपी ने Apple स्टोर में 18 और Google स्टोर में 20 ऐसे ऐप्स की पहचान की है जो सीधे तौर पर ‘कपड़े हटाने’ (Nudify) की क्षमता रखने का दावा करते हैं।
इस रिपोर्ट ने डिजिटल सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान को लेकर टेक दिग्गजों की विफलता को उजागर कर दिया है, जिससे अब दुनिया भर के नीति निर्माताओं और राजनेताओं के बीच आक्रोश बढ़ रहा है।