Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – उत्सव का स्वरूप तय करता बाज़ार

-सुभाष मिश्रहमारे पारंपरिक उत्सवों का स्वरूप बदलता जा रहा है। मोहल्ले, चौक-चौराहे में होने वाले गणेश, दुर्गा पंडालों में अब बाज़ार द्वारा तय आयोजन ज़्यादा हो रहे हैं। पहले समाज...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पड़ोस का नया कन्सेप्ट

-सुभाष मिश्रअब पड़ोस का कन्सेप्ट बदल गया है। हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा कोई व्यक्ति आपका पड़ोसी हो गया है और घर के पड़ोस में रहने वाले से आपकी कोई दुआ-सलाम तक नहीं। रियल और वर्च...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – गांधी को याद करते हुए

2 अक्टूबर पर विशेष-सुभाष मिश्रमेरे बहुत से मिलने जुलने , व्हाटअप यूनिवर्सिटी के ज्ञान से लबरेज़ और गांधी फ़िल्म के बाद लोग गांधी को ज़्यादा जानने लगे की सोच रखने वाले शायद ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सुशासन का मतलब सस्पेंशन नहीं

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में कोई भी सरकार आती है तो वह कहती है कि हम सुशासन लाएंगे। सुशासन का मतलब सस्पेंशन नहीं होता है। सुशासन का मतलब यह नहीं होता कि उसमें कड़ाई की जाए। हम सुश...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - पेजर अटैक : तकनीक का नया खतरा 

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पेजर अटैक : तकनीक का नया खतरा 

-सुभाष मिश्रहम आधुनिक तकनीक के युग में जी रहे हैं। जब हम कहते हैं कि पूरा देश एक गांव है तो वह तकनीक है, जिसने पूरी दुनिया को एक गांव में तब्दील कर दिया है। जब मोबाइल के लिए यह...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – वन नेशन वन इलेक्शन, संभावनाएं और समाधान

-सुभाष मिश्रइस समय देश के जम्मू-कश्मीर राज्य में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। यह चुनाव बहुत दिन से प्रतिक्षित थे। इस बार जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर लोग वोट भी डाल रहे हैं। अ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – मोदी मैजिक, मिथक और मौका 

-सुभाष मिश्रआपदा में अवसर खोजने की कला कोई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीखे। कोरोना से जूझते देश को ताली-थाली बजाकर भयमुक्त करने की बात हो या फिर रातों-रात नोटबंदी करके कालाध...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – समाज की आँखों पर अंधविश्वास का पर्दा

-सुभाष मिश्रहमारे देश में शिक्षा बढ़ी, साक्षरता बढ़ी और तकनीक का बहुत विकास हुआ। विज्ञान ने नए-नए आविष्कार किए। मनुष्य ने चांद पर जाकर कब्जा जमाया। इसके अलावा भी वह बहुत सी जगह...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – अफसरों की उदासीनता पर ‘सरकार नाराज’

-सुभाष मिश्रबेलगाम अफसरशाही और घुड़सवार कहा जाता है कि अफसरशाही घोड़े की तरह होती है और घुड़सवार जिस तरह उसका लगाम कसेगा, घोड़ा उस तरह से चलेगा। अब सवाल है कि अफसरशाही बेलगाम ह...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बोलियों का समंदर बनी हिंदी भाषा 

-सुभाष मिश्रआज हिंदी दिवस पूरे देश में मनाया जा रहा है। जब मैं हिंदी की बात करता हूं तो मैं उसे हिंदुस्तान की तरह देखता हूं। जैसे हमारा देश बहुत सारे समुदायों से मिलकर बना है। ...

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