बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्वदेश वापसी की चर्चाओं के बीच भारत ने अपना रुख फिर से साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण यानी किसी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके देश भेजने का मामला एक विशुद्ध कानूनी विषय है। इसे नियमों के दायरे में रहकर ही सुलझाया जाएगा।
अगस्त 2024 में बदली थी सत्ता
शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को एक बड़े छात्र आंदोलन के बाद गिर गई थी। इसके बाद से ही वह भारत में रह रही हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक इंटरव्यू में स्वदेश लौटने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। हसीना ने कहा था कि उन्हें पता है कि वापस जाने पर उन्हें गिरफ्तारी या जान का खतरा हो सकता है, लेकिन वह फिर भी लौटने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रत्यर्पण पर बांग्लादेश की मांग
बांग्लादेश की सरकार पहले भी हसीना को वापस बुलाने के लिए भारत से औपचारिक आग्रह कर चुकी है। उधर, भारत सरकार इस पूरे मामले को कानूनी प्रक्रियाओं से जोड़कर देख रही है। 78 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना का यह कदम बांग्लादेश के भविष्य के राजनीतिक हालात के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल भारत सरकार किसी भी जल्दबाजी में नहीं है और कानूनी औपचारिकताओं के आधार पर ही आगे कदम उठाने की बात कह रही है।
